झज्जर। सरकारी अस्पताल परिसर की टूटी दीवार को सही करने के एक करोड़ के एस्टीमेट को मुख्यालय से मंजूरी मिल गई है। इससे अस्पताल परिसर सुरक्षित हो जाएगा। लेकिन इसके साथ ही इस टूटी दीवार का लाभ उठा रहे मेडिकल स्टोर, लैब व चाय की दुकानों की अस्पताल की ओर ओपनिंग बंद हो जाएगी। जबकि कई सालों से इनका सीधा संपर्क अस्पताल परिसर से था।
सरकारी अस्पताल परिसर में निजी मेडिकल स्टोर नहीं खुल सकता, लेकिन झज्जर के सरकारी अस्पताल परिसर की दीवार तोड़कर निजी मेडिकल स्टोर, लैब, चाय की दुकान की अवैध ओपनिंग है। अस्पताल के साथ दुकानें तो खुल सकती हैं, लेकिन उनका द्वार गली की ओर होना चाहिए। जबकि अस्पताल की दीवार तोड़कर दुकान संचालकों ने गली और अस्पताल की ओर ओपनिंग कर रखी थी।
स्थिति यह है कि दोनों के बीच बनी दीवार नीची है और कुछ जगह से तोड़ी भी गई है। इसके चलते दुकानदारों का अच्छा व्यापार चल रहा है, लेकिन अस्पताल प्रशासन अब तक कुछ नहीं कर पाया था। क्योंकि दीवार टूटे कई साल हो चुके हैं, इसे दोबारा नहीं बनवाया गया। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चाहरदीवारी को बनवाने के लिए एस्टीमेट मुख्यालय को भेजा था, जिसकी मंजूरी मिल गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने परिसर में निजी मेडिकल स्टोर पर पाबंदी लगाई है। इसके अलावा कैंटीन व अन्य दुकान भी केवल विभाग की अनुमति से खुल सकती हैं। कुछ समय पहले अंदर कैंटीन खोली गई थी, लेकिन बाहर दुकानें होने के चलते कैंटीन चल नहीं सकी। अब भी सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से रसोई खोली गई है। यह तभी सही चल सकेगी, जब अवैध रूप से दीवार को बंद किया जाएगा।
अवैध रूप से निकाले शटर
सिविल अस्पताल में जो दुकानें बनी हुई है, वह कॉलोनी की गली में हैं। दुकानदारों ने दोनों तरफ से शटर निकाल रखे हैं ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवा बेची जा सके और लैब टेस्ट किए जाएं। इसके अलावा अन्य दुकानों पर भी सामान बिक रहा है। यहां दीवार को तोड़कर रास्ते तक बनाए गए हैं।
बनाई गई नई दुकानों के शटर भी अस्पताल की तरफ
पिछले दिनों लगभग चार नई दुकानें भी बनाई गई हैं, जिनके शटर भी अस्पताल की तरफ बनाए गए हैं। अब तक यह दुकान संचालित नहीं हो पाई है। यहां कुल 15 दुकानें बनाई गई हैं। इनमें दो चाय की दुकानें, एक लैब और 6 मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इनमें कुछ दुकानें अभी बंद हैं। ये दुकानें मुख्य रूप से अस्पताल के साथ वाली गली और परिसर के आसपास बनाई गई हैं। मेडिकल परिसर की चाहरदीवारी नीची होने के कारण दुकानदारों ने थोड़ी-थोड़ी दीवार तोड़कर दरवाजा बना लिया है। इससे सीधे अस्पताल परिसर की तरफ आने-जाने का रास्ता बन गया है।
दुकानदारों को मेडिकल परिसर की ओर दरवाजा बनाने की कोई अनुमति नहीं दी गई। अस्पताल की चाहरदीवारी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दीवार को ऊंचा करने और मजबूत बनाने के लिए प्रपोजल मुख्यालय भेजा था, जिसकी मंजूरी मिल गई है। इस पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होगा। जल्द ही इसकी टेंडर प्रक्रिया करवाई जाएगी।
- डॉ. ममता त्यागी, उप सिविल सर्जन