झज्जर। सर्दी बढ़ने के साथ गर्म कपडे़ और रजाई, गद्दों का कारोबार बढ़ने लगा है। इस बार कम वजन वाले कंबल रजाई पर भारी पड़ रहे हैं। गर्म कंबल की बिक्री अधिक हो रही है। रजाई के व्यापारियों ने बताया कि रजाई का व्यावसाय काफी कम हो रहा है, जबकि जयपुरी रजाई और ऊनी कंबल की बिक्री काफी अधिक हो रही है।
शहर में पिछले वर्षों की भांति अबकी बार रजाई के काफी कम ग्राहक पहुंच रहे हैं। व्यापारियों ने बताया कि रजाई की शहरी क्षेत्रों में मांग बहुत कम हो गई है क्योंकि शहरवासी जयपुरी रजाई व कंबल सर्दी से बचाव के लिए खरीद रहे है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से काफी महिला पुरुष रजाई भरवाने के लिए पहुंच रहे हैं। रजाई भरने वाले शकील बिहार निवासी ने बताया सिरोही का भाव 160 से 170 रुपये प्रति किलो का चल रहा है।
उन्होंने बताया कि वह भी रूई भी कई किस्मों की बाजार में आई है जिनमें से मलाई रुई का भाव 160 रुपये , फाइबर रूई का भाव 280 रुपये प्रति किलो, देशी रुई का भाव 250 रुपये प्रति किलोग्राम है। 800 से एक हजार रुपये में एक रजाई की कीमत पड़ती है। जबकि कंबल की कीमत 1500 से लेकर ढाई हजार रुपये तक बाजार में बताई गई है। हालांकि कंबल के रेट 500 रुपये से शुरू हो जाते हैं। हालांकि उनका कहना है कि आगामी दिनों में जैसे ही सर्दी बढ़ेगी रजाई की डिमांड भी बढ़ जाएगी। शालू , अनीता, मनजीत , शकुंतला, रामहेर आदि ने बताया कि कंबल कितना भी महंगा हो लेकिन रजाई की बात अलग है।