06jjrp08- नेशनल हाईवे 352 पर सड़क किनारे खड़ा वाहन। संवाद
झज्जर। सड़क हादसे में घायलों के निजी अस्पताल में जाने पर उनका डेढ़ लाख रुपये तक का फ्री इलाज की सुविधा है। वहीं पिछले तीन माह से पोर्टल बंद होने के कारण निजी अस्पतालों से घायलों की सूचना थानों तक नहीं जा रही है। वहीं स्टेट हाईवे पर कोई अतिरिक्त एंबुलेंस की सुविधा नहीं है।
फिलहाल पोर्टल के कुछ दिन और चालू होने की उम्मीद कम है। सड़क हादसे में घायलों को इलाज के लिए अपनी जेब से ही राशि खर्च करनी पड़ेगी। जिले में 51 आयुष्मान पैनल के अस्पताल इस योजना में शामिल किए गए हैं। अब तक सड़क हादसों में घायल 135 लोग निजी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे जिसमें से 90 लोगों को ही इलाज मिल पाया।
बाकी 45 लोगों में से दस प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने सरकार की योजना का लाभ लेने से इंकार कर दिया जबकि 15 प्रतिशत लोग ऐसे रहे जिनको सड़क दुर्घटना में शामिल नहीं किया जा सकता था। ऐसे लोग साइकिल या बाइक से गिरे थे और उनको हल्की चोटें आई थी। इन दुर्घटनाओं को योजना में शामिल नहीं किया गया है।
ये है योजना
दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 162 के तहत अधिकतम 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये का निशुल्क इलाज होगा। अस्पताल प्रबंधन अपने यहां उपलब्ध सॉफ्टवेयर ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम में घायल व्यक्ति का डेटा अपलोड करके संबंधित पुलिस थाने में भेजेगा। छह घंटे में सड़क दुर्घटना में घायल होने की पुष्टि की जाती है।
इसके बाद घायल व्यक्ति को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है।
नेशनल हाईवे पर एक एंबुलेंस, स्टेट हाईवे पर सुविधा नहीं
नेशनल हाईवे 352 पर डीघल टोल पर एक एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई है जो 35 किलोमीटर का एरिया कवर करती है। पैट्रोलिंग के लिए एक ही गाड़ी उपलब्ध है। इसके अलावा झज्जर-बहादुरगढ़, झज्जर-गुरुग्राम और झज्जर-दादरी स्टेट हाईवे पर कोई अतिरिक्त एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। एंबुलेंस की सुविधा के लिए डायल 112 पर सहायता लेनी पड़ती है।
06jjrp08- नेशनल हाईवे 352 पर सड़क किनारे खड़ा वाहन। संवाद