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जनरल के गांव में मनी होली और दिवाली

Fri, 01 Aug 2014 12:47 AM IST
jhjhar
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बिसान गांव की कच्ची गलियों में अपना बचपन बिताने वाले दलबीर सिंह सुहाग ने बृहस्पतिवार को देश के आर्मी चीफ का पद संभाल लिया। इस खुशी में उनके पैतृक गांव बिसान में होली और दिवाली एक साथ मनाई गई। उनकी नियुक्ति पर गांव में खूब मिठाइयां बांटी गई। गांव के लोगों और जनरल दलबीर सुहाग के परिवार के लोगों ने मिलकर इस खुशी का जश्न मनाया। किसी ने रंग गुलाल से होली मनाई तो किसी ने पटाखों के साथ जश्न मनाकर दिवाली मनाई। गांव से 20 से ज्यादा लोग जनरल के निमंत्रण पर दिल्ली गए हुए हैं। वहीं, गांव में रहने वाले जनरल के माता-पिता मंगलवार दोपहर को ही दिल्ली रवाना हो चुके थे।
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देश के थल सेना के सर्वोच्च पद पर पहुंचे दलबीर सुहाग की नियुक्ति की खुशी में गांव की महिलाओं ने मंगल गीत गाए। खुशी को सांझे तरीके से बांटने के लिए गांव के मुख्य चौक पर टेंट लगाकर सामूहिक रूप से खुशी मनाई गई। सभी ने जहां गाजे-बाजे के साथ नाचते हुए व मिठाइयां बांटते हुए जमकर जशभन मनाया। गांव के हर ठोले से पांच-पांच नुमाइंदे भी दिल्ली में सुहाग की ताजपोशी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह ही कूच कर गए थे। ग्रामीण रणबीर सिंह, दलबीर सिंह, प्रदीप, बलबीर सिंह, नफे सिंह आदि ने कहा कि गांव के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है कि उनके गांव का बेटा सेना का सबसे बड़ा अफसर बन गया है।
   
गांव के लिए स्पेशल भर्ती की मांग
गांव बिसान में जश्न मनाए जाने के दौरान ग्रामीणों में दलबीर सुहाग से उम्मीद की चमक भी दिखाई दी। प्रवीण भारद्वाज, नरेंद्र, योगेश, कालू, सुमित ने मांग की कि क्षेत्र के लिए विशेष भर्ती खोली जाए।
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गांव में जनरल को देखने के लिए ग्रामीण बेताब
गांव के जिस सरकारी स्कूल में सुहाग ने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी, उसी स्कूल में साफ-सफाई का काम भी जोर-शोर से चल रहा है। सेवानिवृत्त फौजी प्रदीप सुहाग ने बताया कि करीब एक माह पूर्व कादियान बारह दिल्ली जाकर दलबीर सुहाग से मिली थी तो खाप के प्रतिनिधियों ने सुहाग से उनके पैतृक गांव बिसान आने की बात कही थी। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि सुहाग जल्दी ही अपने पैतृक गांव आएंगे।
 
मां मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर मांग रही थी दुआ
दलबीर सुहाग की ताजपोशी को लेकर गांव के मंदिर में महिलाओं द्वारा सावन के माह से प्रसाद चढ़ाकर मंगल गीत गाए जा रहे हैं। महिलाओं का कहना था कि मंदिर में प्रसाद चढ़ाए जाने व मंगल गीत गाए जाने के दौरान दलबीर की मां ईशरी देवी भी उनके साथ होती थी।

हिंदुस्तान जिंदाबाद के लगाए नारे
बाबा भीष्म की जय हो, हिंदुस्तान जिंदाबाद और दलबीर सुहाग जिंदाबाद के जयकारे भी गांव वालों ने लगाए। खुशी के इस जश्न में गांव के बच्चे, बूढ़े, महिला और युवा हर वर्ग के लोगों ने शिरकत की और एक साथ मिलकर अपनी खुशी का इजहार किया है।
 
बचपन के दोस्त ने कहा, तालाब किनारे पेड़ों के नीचे लगती थी क्लास
कोई पचास बरस पहले की बात है। पहली से तीसरी कक्षा तक हम एक साथ पढ़े। दलबीर सुहाग शुरू से होनहार बालक था। घर से सीधे स्कूल और स्कूल से सीधे घर ही पहुंचता था। कक्षा में और लड़के भी थे। हमेशा की तरह कलम-दवात और स्याही पर आपस में तू तड़ाक तो आम बात थी, पर तख्ती लिखने में जो सुलेख दलबीर का था, उसका कोई सानी नहीं था। ये यादें उनके साथ तीन कक्षाएं पढ़ने वाले छोटू राम ने बांटे। दलबीर सुहाग की सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर वो फूले नहीं समा रहे।

वे बताते हैं तीसरी कक्षा में बिछुड़ने के  बाद आज तक दोबारा तो नहीं मिले हैं। हालांकि छोटू राम हरियाणा सरकार में पंप आपरेटर की नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और अब घर पर हैं। उनके अनुसार पहली कक्षा में जब वे पढ़ते थे तो स्कूल का भवन नहीं बना था। दलबीर सुहाग के घर के समीप जो तालाब है उसके साथ लगते पेड़ों के नीचे ही कक्षा लगती थी, मगर दूसरी और तीसरी कक्षा करते हुए स्कूल में दो कमरे बन गए थे जो आज भी विद्यालय में मौजूद हैं। हालांकि आज स्कूल दस जमा दो स्तर का हो चुका है। अपनी खुशी की बात करते हुए वे बताते हैं कि होनहार बालक की पहचान अलग होती है और यह दलबीर में थी। दलबीर सुहाग जिस मुकाम पर पहुंचे हैं उससे इस गांव, क्षेत्र का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन हुआ है।
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