फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों को समय पर मिलेगा मुआवजा ः रंगा

Sun, 15 May 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
विज्ञापन
स्टेशन - फोटो : Bureau
विज्ञापन
रेल लाईन बिछाने के लिए किसानों की अधिग्रहित की गई जमीन की मुआवजा राशि का भुगतान  समय पर किया जाएगा। इसलिए रेलवे स्टेशन की नीलामी होने जैसी कोई बात हो ही नहीं सकती। यह कहना है रेलवे के इस मामले से संबंधित एडवोकेट सुरेंद्र रंगा का। सुरेंद्र रंगा कहते है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते ऐसा पेंच फंसा है। 
विज्ञापन


दरअसल जमीन के अधिग्रहण को  दी जाने वाली मुआवजा राशि को लेकर जमीन देने वालो किसानों द्वारा मुआवजा राशि कम दिए जाने को लेकर ङाली की अदालत में दायर की गई याचिका को लेकर स्थानीय अदालत द्वारा रेलवे स्टेशन व उसकी झज्जर स्थित संपत्ति को नीलाम किए जाने के आदेश दिए जाने की तह में जाकर देखा  जाए तो पूरे मामले में   जिला  प्रशासन की कार्यप्रणाली की ही लापरवाही  से ही ऐसी नौबत आई  है। रेलवे जहां अदालती आदेशानुसार मुआवजा देने के लिए तत्पर नजर आ रही है, वहीं जिला  प्रशासन की लेट लतीफी  से रेलवे की किरकिरी अदालत के  फैसलों  से हो रही है।

पूरे मामलों  पर निगाह डाली जाए तो रेलवे नीलामी की तारीख  से पूर्व ही मुआवजे की रकम दावेदारों को चुका देगी और रेलवे स्टेशन व उसकी संपत्ति नीलाम होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। गौरतलब  है कि रेवाड़ी-रोहतक रेलवे लाईन के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2007 में रेवाड़ी से रोहतक तक जमीन का अधिग्रहण किया था। इसकी 50 प्रतिशत रकम राज्य सरकार व 50 प्रतिशत राशि रेलवे ने दी थी। अधिग्रहण के दौरान तय की जाने वाली कीमत संबंधित किसानों को दे दी गई थी।
विज्ञापन


लेकिन झज्जर  रेलवे स्टेशन व इसके आसपास की जमीन के मालिकों ने स्थानीय  एक अदालत में मुआवजा बढ़ाने संबंधित याचिका दाखिल  की थी। जिसके बाद  अदालत ने रेलवे को करीब दो करोड़ रुपये की ज्यादा मुआवजा राशि किसानों के वितरित करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों की अनुपालना में रेलवे ने  डीआरओ से फार्म बी   तैयार कर रेलवे को भेजने की अनुशंसा की थी। यहीं पर बात  अटक गई और डीआरओ ने फार्म बी पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी की। जिसके चलते किसानों की बढ़ी हुई मुआवजा राशि अटक गई और अदालत ने पूर्व में अटैच की गई रेलवे की संपत्ति को नीलाम करने के आदेश दे दिए।

 रेलवे  शुरू से ही किसानों को मुआवजा राशि देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए एक कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसके तहत  डीआरओ को फार्म बी  तैयार कर विभाग को भेजना था। डीआरओ ने इस मामले में लापरवाही  की और उसी का परिणाम है कि मुआवजा देने में देरी हुई। चूंकि अब फार्म बी की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है, ऐसे में रेलवे की तरफ से किसानों को उनके बकाया मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा। सुरेंद्र रंगा, एडवोकेट, रेलवे।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें