आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र की टुडे फुटवियर फैक्ट्री में धधकती आग के बीच यहां दूसरी फैक्ट्री से कार्टून सप्लाई करने आए दो श्रमिक ऊपरी मंजिल के पास सीढ़ियों में ही जिंदा जल गए। घटना के 30 घंटे बाद शव के नाम पर हड्डियां ही दिखाई दे रही थीं। कपड़े में बांधकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल हास्पिटल ले जाया गया। इस हादसे को देखकर हर कोई सहमा हुआ था। मरने वाले दोनों श्रमिक अविवाहित बताए गए।
शुक्रवार की आधी रात को टुडे फुटवियर फैक्टरी के बेसमेंट से आग सुलग गई थी। कुछ देर में पूरी फैक्ट्री आग की चपेट में आ गई। पूरी फैक्ट्री की बिल्डिंग धुएं व आग के गुबार में लिपट गई। जिस समय फैक्ट्री में आग लगी उस दौरान यहां दूसरी फैक्ट्री से कार्टून सप्लाई करने के लिए आए दो श्रमिक सूरज व नीरज जोकि यूपी के एटा व हरदोई जिले के निवासी थे और हाल में वे बाबा हरिदास नगर टीकरी बार्डर के पास रहते थे। जब वे आग से बचने के लिए सीढ़ियों की तरफ भागे तो दरवाजा बंद होने के चलते वे वहीं फंस गए और आग की लपटों में ही झुलस गए। इससे उनकी मौत हो गई। शनिवार को परिजन उनकी तलाश में फैक्ट्री पहुंचे, लेकिन यहां से उन्हें पता चला कि वे तो टुडे फैक्ट्री में कार्टून सप्लाई करने के लिए गए हुए थे, लेकिन यहां भी वे नहीं मिले।
जिससे परिजन उनकी मौत होने का अंदेशा लगातार जता रहे थे।
उन्होंने पुलिस से भी इस मामले में उनकी तलाश किए जाने की गुहार की थी, लेकिन धधकती आग के बीच पुलिसकर्मी भी अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। जब 30 घंटे बाद आग पूरी तरह से कंट्रोल में हुई तब यहां सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस की टीमें घटना वाले दिन से लेकर रविवार तक यहां निगरानी में रही। रविवार की सुबह जब फैक्ट्री का कोना-कोना खंगाला तो दोनों के शव एक-दूसरे के नजदीक ही सीढ़ियों में बुरी तरह से जले हुए मिले। शव के नाम पर केवल कंकाल था। दूर से शवों के बारे में यह नहीं पता लगाया जा रहा था कि कौन सा शव किसका है। कपड़ों के बचे हुए हिस्सों के आधार पर उनका पता चल पाया। सूरज व नीरज नामक श्रमिक के शव मिलने की सूचना स्थानीय पुलिसकर्मियों ने
उच्च अधिकारियों को दी। जिसके बाद पुलिस ने घटना की गहन जांच करते हुए शवों को लेकर पोस्टमार्टम कराने की कार्रवाई अमल में लाई।
रो-रोकर बुरा हाल
दोनों श्रमिकों की मौत पर परिवार व आसपास के श्रमिक भी सकते में थे। हर कोई पीड़ित परिवार को दिलासा दे रहा था साथ में भाग्य की इस विधाता को भी कोस रहा था। अपने बीच कनको न पाकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। फैक्ट्री के बाहर खड़े लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन उनकी आंखों में आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। नीरज दो बहनों का इकलौता भाई था तो सूरज दो भाइयों में छोटा। फैक्ट्री प्रबंधन भी मृतकों के परिजनों से बातचीत करते हुए उन्हें दिलासा देने में लगे हुए थे।
परिजनों के बयान पर होगी कार्रवाई
दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। शव रोहतक पीजीआई भेजे गए हैं। परिजनों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। उनके बयान के आधार पर कार्रवाई होगी। श्रमिकों की मौत के मामले में प्रबंधन की लापरवाही रही है या नहीं यह जांच का विषय है। इसमें जो कुछ सामने आएगा उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
-विष्णु प्रसाद, सिटी एचएचओ बहादुरगढ़।