स्थानीय नागरिक अस्पताल का विवादों के साथ चोली दामन का साथ रहा है। प्रतिदिन किसी न किसी मामले को लेकर अस्पताल अकसर चर्चाओं में बना रहा है। अभी प्राइवेट रूम मामला शांत भी नहीं हुआ था कि वीरवार को आउट सोर्सिंग पॉलिसी के तहत निजी फर्म के माध्यम से अस्पताल में लगे हुए 28 कर्मचारियों को बिना मानदेय दिए हटा दिया गया। जैसे ही इन कर्मचारियों को हटाने का फरमान मिला तो कर्मचारियों के चेहरों पर मायूसी छा गई और कर्मचारी मन मसोस कर घर लौट गए। कार्यरत प्रीत, प्रवीण ने बताया कि वीरवार को मामले को लेकर सीएमओ से मुलाकात की जाएगी।
गौरतलब है कि इन कर्मचारियों को लगाने के आदेश अप्रैल माह में सीएमओ ने दिए थे। जिसके चलते कंप्यूटर ऑपरेटरों को ट्रेनिंग भी दी गई थी, लेकिन पिछले मानदेय न मिलने के चलते कर्मचारियों ने अकाउंट ब्रांच में संपर्क किया। विभाग के अकाउंट ऑफिसर ने अपने हेडक्वार्टर में बजट के बारे में पता किया तब मामले का खुलासा हुआ कि इन 28 पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को लगाने की मंजूरी ही नहीं ली गई, तब इनका बजट कैसे आएगा। हेड ऑफिस से इस बात का खुलासा होने पर अस्पताल प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और पूरी टेंडर प्रक्रिया का अवलोकन किया, तब जाकर पूरे मामले का पता चला। फिर अस्पताल प्रशासन द्वारा ठेकेदार को कर्मचारियों को हटाने संबंधित पत्र जारी कर दिया। हटाने वाले कर्मचारियों में डाटा एंट्री ऑपरेटर, सिक्योरिटी गार्ड, लिफ्ट ऑपरेटर, सर्विस मैन, वार्ड सर्वेंट, माली आदि शामिल हैं।
आउट सोर्सिंग का चार्ज उनके पास नहीं है। आउट सोर्सिंग का चार्ज एसएमओ गर्ग के पास है। एसएमओ गर्ग के छुट्टी पर चले जाने के चलते उन्हें चार्ज सौंपा गया है। उन्हें सिर्फ इतना ही पता है कि इन कर्मचारियों की अप्रवूल के लिए मुख्यालय को भेजा गया है। अप्रवूल न मिलने तक ठेकेदार को इन कर्मचारियों की हाजरी न लगवाने के लिए कहा गया है।
-डॉ. कुलदीप कार्यवाहक एसएमओ, झज्जर नागरिक अस्पताल