पिछले काफी समय से मरीजों के लिए सुविधाओं के टोटे के कारण विवादों में रहे स्थानीय नागरिक अस्पताल में उड़ रही नियमों की धज्जियों का एक और कारनामा देखने को मिला। अस्पताल प्रशासन की ओर से खुद के रिस्क पर बगैर किराया लिए करीब साल भर तक मरीज दंपति को रहने की अनुमति दे दी। मामला मीडिया में आने के बाद अब इस ओर से हर कोई अपना रुख मोड़ता दिखाई दे रहा है। आपको बता दें कि नागरिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में सीएमओ द्वारा बनाए गए रेस्ट हाउस के ठीक साथ सटे कमरे में बीते करीब एक साल से कब्जा जमाए बैठे मरीज की पत्नी मंगलवार अल सुबह खुद का ताला लगाकर मरीज पति को लेकर फरार हो गई। मामला संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम और तहसीलदार जांच के लिए मौके पर पहुंचे और ताला तुड़वाकर कमरे की तलाशी ली गई। कमरे में भारी मात्रा में सामान मिलने के साथ सर्दियों में इस्तेमाल की गई दो रजाइयां भी मिली हैं। इतना ही नहीं कमरे में नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए दो की जगह बिस्तरों सहित तीन बेड भी पाए गए हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन से कब्जा किए गए रूम नंबर 80 के साथ सीएमओ के निवास स्थान वाले रूम का भी बुधवार तक रिकॉर्ड तलब करने के साथ जांच करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की बात कही है। फिलहाल कमरे में मिले सामान की सूची बनाकर उसे अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिया गया है।
मरीजों के लिए एक बेड पर दो और प्राइवेट रूम में दो के लिए तीन बेड
अगर अस्पताल में वार्डों की तरफ देखा जाए तो कई बार बेडों की कमी के कारण एक बेड पर दो मरीजों के लिए भी व्यवस्था कर दी जाती है, लेकिन यहां पर एक रूम ऐसा भी देखने को मिला, जिसमें दो मरीजों के लिए तीन बेडों की व्यवस्था की गई है और साल भर से उसका किराया भी नहीं लिया जा रहा। मरीज का इलाज भी बंद हो चुका है। अगर ऐसे ही अस्पताल के कमरों को प्राइवेट प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया तो अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए मरीजों के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
राजनीतिक दबाव के चलते था सब कुछ
जानकारी अनुसार नवीन नामक एक मरीज करीब एक साल पहले कमर से नीचे के हिस्से में लकवे की शिकायत के चलते अस्पताल परिसर में ही स्थित पंचकर्म में इलाज के लिए पहुंचा था। यहां से इलाज शुरू होने के बाद किसी तरह जुगत लगाकर उक्त मरीज की पत्नी ने अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में एक रूम हासिल कर लिया। जब-जब सामान्य अस्पताल के अधिकारियों ने कमरे को खाली कराने की कोशिश की तो ऊपरी दबाव से उनकी कोशिशें दबकर रह गईं। सूत्रों के मुताबिक उक्त मरीज का इलाज पंचकर्म में भी बंद हो चुका है। लेकिन दंपति इसी कमरे में कब्जा जमाए बैठा है। प्राइवेट रूम का एक दिन का किराया 250 रुपये पहले से ही निश्चित किया हुआ है, लेकिन अपनी ऊंची पहुंच के चलते इस कमरे का कोई भी शुल्क अदा नहीं किया गया।
सीएमओ ने भी मोड़ा मामले से रुख
उक्त मरीज का झज्जर के सामान्य अस्पताल में न तो इलाज चल रहा था और न ही उससे अस्पताल प्रबंधन किसी प्रकार का कोई शुल्क ही ले रहा था। हैरान करने वाली बात यह भी है कि इसी मरीज के साथ सटे कमरे में स्वयं सीएमओ भी अपनी कोठी को छोड़कर पिछले एक माह से अपना डेरा जमाए बैठे थे, लेेकिन जब उनसे इस बार में मीडिया ने जानकारी लेने का प्रयास किया तो सीएमओ साहब ने इस प्रकार की कोई भी जानकारी उनके पास न होने की बात कही थी। पूरे मामले को लेकर अस्पताल में बीते काफी दिनों से कई तरह की चर्चाएं थीं।
अस्पताल की ओर से हर कोई छुड़ा रहा मामले से पीछा
अस्पताल के किसी भी कर्मचारी से बात करने पर एक ही जवाब मिल रहा है कि उसे इस बारे में कोई भी सूचना नहीं। अगर मामले को गहनता के साथ देखा जाए तो सीएमओ के रेस्ट रूम के साथ सटे कमरे के अंदर की जानकारी क्या किसी भी अस्पताल कर्मी को नहीं थी। कमरे से एक घर में प्रयोग होने वाले हर सामान की मौजूदगी मिली है। सूत्रों से ये भी पता चला कि दोनों करीब साल भर से अस्पताल के प्राइवेट रूम पर कब्जा जमाए हुए थे।
प्रशासनिक और अस्पताल अधिकारियों के बीच 20 मिनट तक गुफ्तगू
मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम सिवाच और तहसीलदार हरिंद्र शर्मा ने मौके पर पहुंचकर विवादित स्थल का जायजा लिया। इससे पहले उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के साथ एसएमओ रूम में करीब 20 मिनट तक गुफ्तगू की। मीडिया के मौके पर पहुंचते ही विवादित कमरे की गंभीरता से जांच की, जिसमें पाए गए घरेलू सामान को सील करवाकर अस्पताल प्रबंधन के हवाले किया गया।
मामले की गंभीरता के साथ जांच की जा रही है। इस मामले में अस्पताल का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। जो भी अधिकारी मामले में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सतेंद्र सिवाच, एसडीएम