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सरल, सरस और प्यार की भाषा है हिंदी

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अमर उजाला के अभियान हिंदी हैं हम से लोग लगातार जुड़ रहे हैं। बहादुरगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार राज कुमार अरोड़ा गाइड, झज्जर के पूर्व प्राचार्य ओम सिंह सिद्धांती और आर्मी स्कूल में शिक्षक राजेश भी हिंदी के दीवाने हैं। अमर उजाला की मुहिम की तीनों ने सराहना की है और अन्य लोगों से भी इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान किया है। हिंदी सरल, सरस और प्यार की भाषा है।
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सरल और सुबोध हिंदी अपनानी होगी
हिंदी के प्रति लोगों में चेतना जागृत करने के लिए सरल सुबोध हिंदी में विशाल स्तर पर प्रचार करना होगा। सिनेमा व टीवी चैनलों की भूमिका, सोशल मीडिया ने हिंदी को बढ़ावा तो दिया पर हिंग्लिश हिंदी पर हावी हो रही है। यह हिंदी के तथाकथित परम विद्वानों की भाषिक अक्षमता अपनी भाषा के प्रति लापरवाही है। हम गर्व, गरिमा, गौरव, अभिमान, स्वाभिमान के साथ हिंदी का प्रयोग क्यों नहीं करते। क्या कभी हमने अंग्रेजों को अंग्रेजी दिवस मनाते देखा, सुना है। हम सब हिंदी प्रेमियों को बदलते परिवेश में, हर नई तकनीक को अपना कर, पूरे भारतवर्ष को हिंदीमय बनाना होगा। भारत में 48 करोड़ से अधिक लोगों की प्रथम भाषा हिंदी है। 14 करोड़ के लगभग हिंदी कम जानते हैं, लेकिन सिनेमा, टीवी चैनल, ई-पत्र पत्रिकाएं, मुद्रित समाचार पत्र, पत्रिकाओं का व्यापक प्रयोग हिंदी को जन-जन के समीप ले आया है।
राजकुमार अरोड़ा गाइड, कवि, बहादुरगढ़
हमें अपनी संस्कृति को अपनाना चाहिए
प्रत्येक भारतीय को हिंदी में कार्य करना चाहिए। हिंदी भाषा में जैसा हम बोलते हैं वैसे ही लिखने में आती है। तकनीकी युग में भी कंप्यूटर में हिंदी भाषा का कई जगह पर उपयोग होता है आज के समय में अखबार प्रिंटिंग का काम भी कंप्यूटर के द्वारा होने लगा है जो काफी उपयोगी साबित हुआ है। ऑनलाइन माध्यम में हिंदी भाषा का प्रयोग करेंगे तो उपयोग करने वाले और सामग्री जिस को भेजी गई है उसको भी जल्द समझ में आएगी। हमें अपनी संस्कृति को अपनाना चाहिए। दुख की बात है कि लोग पश्चिमी सभ्यता की तरफ ज्यादा रुक करने लगे हैं। लोगों को अपने मन में धारणा बनानी चाहिए कि हमें भारत देश को हिंदी राष्ट्र बनाना है। मातृभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना है। हिंदी भाषा सभी उन्नति की मूल है।
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ओम सिंह सिद्धांती, पूर्व प्राचार्य, झज्जर
विश्वभर में हिंदी का होता है सम्मान
हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए और इसके महत्व को बताने के लिए भारत के नेता और साहित्यकारों ने हिंदी की बारे में काफी कुछ कहा है। सभी ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रयास किए हैं। हिंदी भाषा का सारे विश्व में सम्मान किया जाता है। यह विश्व में तीसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। अगर सभी देशवासी सम्मिलित रूप से प्रयास करेंगे तो हिंदी के प्रचार और विकास को कोई नहीं रोक सकता। राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं होता वह देश उन्नत नहीं हो सकता। सभी देशवासियों को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव होना चाहिए।
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राजेश, शिक्षक, आर्मी स्कूल, झज्जर
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