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स्तन कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी : डॉ. आकाश

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दुनिया और भारत में स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। स्तन कैंसर से हर साल दुनिया में 21 लाख महिलाएं पीड़ित होती हैं और भारत में हर साल इसके 1,62,428 नए मामले दर्ज हो रहे हैं। महिलाओं में कैंसर से होने वाली कम से कम 12 फीसदी मौतें इस खतरनाक बीमारी से होती हैं।
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स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट झज्जर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकाश ने बताया कि स्तन कैंसर की दर भारत में खासकर तीस साल के शुरुआती चरण की महिलाओं में बढ़ रही है। वर्ष 2018 में भारत में 87,090 महिलाओं की मौत स्तन कैंसर से हुई। यह शहरों में स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या बन गया है। वर्ष 2030 तक स्तन कैंसर के कारण होने वाली महिलाओं की मौत की संख्या किसी भी अन्य कैंसर से होने वाली मौतों के मुकाबले बहुत ज्यादा हो जाएगी। यदि स्तन कैंसर की पहचान समय रहते कर ली जाए, तो मरीज के बचने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। अगर पहचान में देरी हो जाती है तो मरीज के बचने की संभावना भी कम होती जाती है। स्तन कैंसर पूरी दुनिया में महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है, लेकिन फिर भी स्तन कैंसर के कारणों के बारे में जानकारी व समझ बहुत कम है। स्तन कैंसर के अनेक कारण हो सकते हैं। ये व्यक्ति के जींस एवं जीवनशैली पर निर्भर हो सकते हैं।
पांच साल में हो जाती है 50 फीसदी मरीजों की मौत
डॉ. आकाश कुमार ने कहा कि स्तन कैंसर के लगभग 50 फीसदी मरीज निदान के 5 सालों से ज्यादा जीवित नहीं रह पाते। भारत में स्तन कैंसर अन्य देशों के मुकाबले अलग है। यहां पर स्तन कैंसर से युवा महिलाएं पीड़ित हो रही हैं और उनमें से आधी से ज्यादा महिलाओं में कैंसर एडवांस्ड स्तर तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राष्ट्रीय कार्यक्रम में कैंसर की रोकथाम व नियंत्रण के लिए, डायबिटीज, कार्डियो वैस्कुलर बीमारियों एवं स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस), आम कैंसर यानी ओरल, स्तन एवं कर्विकल की रोकथाम, जांच व स्क्रीनिंग के लिए कार्यक्रम 150 से ज्यादा जिलों में क्रियान्वित किए जा रहे हैं।
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