झज्जर। महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम में दो दिवसीय गीता महोत्सव का शुक्रवार को आगाज हुआ और इसमें हरियाणा कला की छटा हर ओर बिखरी रही। उपायुक्त शक्ति सिंह ने स्टेडियम में जिलास्तरीय गीता महोत्सव के पहले दिन बतौर मुख्यातिथि कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले उन्होंने समारोह स्थल पर यज्ञ में पूर्णाहुति डाली।
उपायुक्त ने कहा कि गीता एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि बेहतर जीवन जीने का सिद्धांत भी है। उन्होंने गीता महोत्सव स्थल पर हरियाणा की विकास गाथा पर आधारित और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देती प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों की तीन दर्जन से अधिक स्टॉल लगाई गई हैं। यहां धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं की स्टॉल के अलावा कृषि विभाग द्वारा ड्रोन द्वारा ईत्र का छिड़काव खास रहा। महोत्सव के शुभारंभ पर विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं, विभागीय कलाकारों की टीम ने गीता सार व हरियाणवी संस्कृति से सराबोर कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। बीन, दीपक भांगड़ा पार्टी ने भी मंच पर हरियाणवी कला का छटा बिखेरी।
17 प्रकार का शहद बना रहा मलिकपुर का मेनपाल व उनका बेटा
कार्यक्रम में मलिकपुर गांव निवासी मेनपाल ने भी अपनी स्टॉल लगाई हुई थी। मेनपाल व उसका बेटा विनय फौगाट 17 प्रकार का शहद तैयार करते हैं। यह शहद प्राकृतिक रूप से ही तैयार होता है और किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती। यहां तक की उनको आंखों में डाला जाए तो वह नुकसान नहीं पहुंचाता। इसी प्रकार जोड़ों के दर्द दूर करने के लिए मोम पर पोलिश तैयार की है। यह मोम मधुमक्खी के छत्ते से प्राकृतिक रूप से मिलती है। इस लगाने से जोड़ों के दर्द को काफी आराम मिलती है। इसके अलावा बी-पोल भी तैयार किया जाता है। जो फूलों के पराग से तैयार होता है। इससे शरीर को बी-12 यानी विटामिन मिलता है। इसके लिए विनय फौगाट को सम्मान मिल चुका है। अक्तूबर में वह दिल्ली में उपराष्ट्रपति से भी मिले थे।
बाजरा की नमकीन और लड्डू तैयार कर रही बवानिया की बनारसी देवी
महेंद्रगढ़ जिले के बवानिया गांव की बनारसी देवी ने कृषि विभाग की मदद से स्टॉल लगाया है। वह गांव में बाजरा से नमकीन, मट्ठी, गुंद के लड्डू और फाफड़ा सहित अचार बनाने का काम करती हैं। उनको हर माह 30 से 40 हजार रुपये के ऑर्डर मिल जाते हैं। गीता जयंती में भी उनकी नमकीन व लड्डू को काफी पसंद किया गया। वह खुद भी 25 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं, जबकि उनके साथ 300 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। वह केवल आर्गेनिक बाजरा ही खरीद करती हैं और उससे ही सामान बनाती हैं।
50 से 6 हजार रुपये तक का हाथों से बना हाथी
गीता जयंती समारोह में बहादुरगढ़ निवासी एवं नेशनल अवार्डी चंद्रकांत बोंदवाल भी अपने हाथों से बनी कलाकृतियां लेकर पहुंचे। उन द्वारा लाल चंदन से बनी हुई मालाएं प्रदर्शित की। इनका मूल्य 150 से 500 रुपये तक था। इसके अलावा उन्होंने हाथी की हाथ से बनी कलाकृतियां भी प्रदर्शित की। इसकी कीमत 50 रुपये से 6 हजार रुपये तक की थी। यह विशेष लकड़ी कसान से बनी हुई थी।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री कांता देवी, पूर्व चेयरपर्सन सुनीता चौहान, मंडल अध्यक्ष केशव सिंघल, एसडीएम विशाल कुमार, नगराधीश प्रवेश कादियान, अंकित कुमार एचसीएस, डीआरओ प्रमोद चहल, एसई पब्लिक हेल्थ सतीश जनावा, डीडीपीओ ललिता वर्मा, डीआईपीरओ सतीश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार, डीईईओ सुभाष भारद्वाज, डीआईओ अमित बसंल, डीएसओ ललिता मलिक, एआईपीआरओ डॉ. अश्विनी कुमार, अधीक्षक धर्मबीर गुलिया, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. ईश्वर जाखड़ आदि