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कारगिल युद्ध: घायल मेजर को बचाने के बाद खुद मश्कोह घाटी में बलिदान हो गए थे हरिओम

Thu, 24 Jul 2025 09:22 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी झज्जर

सार

17-जाट रेजिमेंट में हवलदार रहे खुंगाई गांव के हरिओम धारीवाल कारगिल युद्ध में 7 जुलाई 1999 की रात मश्कोह घाटी में बम धमाके में शहीद हो गए थे।
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हरिओम धारीवाल - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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17-जाट रेजिमेंट में हवलदार रहे खुंगाई गांव के हरिओम धारीवाल कारगिल युद्ध में 7 जुलाई 1999 की रात मश्कोह घाटी में बम धमाके में शहीद हो गए थे। शहादत से पूर्व हरिओम ने अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे खुंगाई गांव के ही मेजर राजेंद्र की जान बचाई थी। यह भी अजीब संयोग रहा कि वे 7 जुलाई के दिन ही जन्मे थे और इसी दिन उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।

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साल 1978 में हुए थे सेना में भर्ती 

खुंगाई गांव निवासी हवलदार हरिओम धारीवाल 19 जुलाई 1978 को दसवीं में पढ़ते हुए हिसार से सेना में भर्ती हुए थे। उन्हें अप्रैल 1999 को कानपुर से घाटी भेजा गया था। बेटे अजय धारीवाल ने बताया कि कारगिल संघर्ष के दौरान पिता की टुकड़ी 7 जुलाई 1999 की रात दुश्मन को खदेड़ने के लिए मश्कोह घाटी में आगे बढ़ रही थी। टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे खुंगाई गांव के ही मेजर राजेंद्र दुश्मन की गोली लगने से घायल हो गए थे।

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हरिओम ने अपनी कमर पर लादकर मेजर को कैंप तक पहुंचाया। फिर दोबारा टुकड़ी में शामिल हो गए। मेजर के घायल होने के बाद टुकड़ी की अगुवाई कर रहे युवा कैप्टन अनुज नैय्यर दुश्मन की गोली लगने से बलिदान हो गए। गिरते-गिरते उन्होंने सीनियर हवलदार हरिओम को टुकड़ी का नेतृत्व संभालने के लिए कहा।

इसके बाद हरिओम कैप्टन अनुज को बचाव दल के हवाले कर आगे बढ़े। हरिओम और उनके साथियों ने दुश्मन के लोगों को मौत के घाट उतारा लेकिन उनका असलहा बारूद खत्म हो गया। इसके बाद हरिओम बंदूक उल्टी करके दुश्मन पर टूट पड़े। इस दौरान एक बम धमाके में वे शहीद हो गए थे।

पिता चंदराम सेना में रहे मेजर, दो लड़ाइयां लड़ीं

बेटे अजय धारीवाल ने बताया कि उनके पिता हरिओम धारीवाल का जन्म 7 जुलाई 1959 को गांव खुंगाई में हुआ था। उनके दादा चंदराम जाट रेजिमेंट में मेजर थे। वे 1965 और 1972 के युद्ध में अपनी सेवा दे चुके थे। अजय ने बताया कि पिता शहादत के बाद मां निर्मला देवी भी एक सड़क हादसे में दुनिया छोड़ गईं। अजय ने बताया परिवार में अब वे सिर्फ भाई-बहन हैं। बहन ऋतु की सेना में मेजर भावेश से हुई हुई है जबकि वे खुद पेट्रोल पंप संभालते हैं।
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