हरिओम ने अपनी कमर पर लादकर मेजर को कैंप तक पहुंचाया। फिर दोबारा टुकड़ी में शामिल हो गए। मेजर के घायल होने के बाद टुकड़ी की अगुवाई कर रहे युवा कैप्टन अनुज नैय्यर दुश्मन की गोली लगने से बलिदान हो गए। गिरते-गिरते उन्होंने सीनियर हवलदार हरिओम को टुकड़ी का नेतृत्व संभालने के लिए कहा।
इसके बाद हरिओम कैप्टन अनुज को बचाव दल के हवाले कर आगे बढ़े। हरिओम और उनके साथियों ने दुश्मन के लोगों को मौत के घाट उतारा लेकिन उनका असलहा बारूद खत्म हो गया। इसके बाद हरिओम बंदूक उल्टी करके दुश्मन पर टूट पड़े। इस दौरान एक बम धमाके में वे शहीद हो गए थे।
पिता चंदराम सेना में रहे मेजर, दो लड़ाइयां लड़ीं
बेटे अजय धारीवाल ने बताया कि उनके पिता हरिओम धारीवाल का जन्म 7 जुलाई 1959 को गांव खुंगाई में हुआ था। उनके दादा चंदराम जाट रेजिमेंट में मेजर थे। वे 1965 और 1972 के युद्ध में अपनी सेवा दे चुके थे। अजय ने बताया कि पिता शहादत के बाद मां निर्मला देवी भी एक सड़क हादसे में दुनिया छोड़ गईं। अजय ने बताया परिवार में अब वे सिर्फ भाई-बहन हैं। बहन ऋतु की सेना में मेजर भावेश से हुई हुई है जबकि वे खुद पेट्रोल पंप संभालते हैं।