कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन में सरकार द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए तो इस बीच कई लोगों ने रचनात्मक कार्य भी किए। लोगों ने मास्क, साबुन, सैनिटाइजर और भोजन बांटने के अभियान चलाने के साथ जागरूकता अभियान, जरूरतमंद बच्चों के लिए मुफ्त बुक बैंक और कोविड-19 के प्रति जागरुकता के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन कोर्स भी शुरू किए।
जरूरतमंदों के लिए बनाया बुक बैंक
कोरोना संक्रमण के दौरन गरीबों को राशन और डॉक्टरों को पीपीई किट उपलब्ध करवा रहे अमनदीप भारद्वाज व उसके साथियों द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट ‘स्प्रेड होप’ ने बहादुरगढ़ के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए बुक बैंक की व्यवस्था की। इस बुक बैंक में 250 से अधिक व्यक्तियों ने पुरानी पुस्तकें दान कीं। राकेश राठी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए सहायक साबित हुआ, बल्कि लॉकडाउन में गरीब परिवारों का बोझ भी हल्का किया है। इन युवाओं ने स्वामी विवेकानंद के अमृत वचन ‘वही जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं’ से प्रेरित होकर संकट की घड़ी में सेवा की।
नि:शुल्क सर्टिफिकेट कोर्स चलाया
मिशन ‘जिंदगी’ के तहत सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर ने नोबेल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जानकारी से परिपूर्ण नि:शुल्क ऑनलाइन कोर्स शुरू किया। इस कोर्स से काफी लोगों को न केवल उपयोगी जानकारी मिली, बल्कि इन लोगों ने लाकडाउन में खुद को व्यस्त भी रखा। हेल्थकेयर के सीईओ व एमडी डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि भारत में कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यह पहला कोर्स रहा। कोर्स में नोबेल कोरोना वायरस से संबंधित विस्तृत जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई गई है। डाटा सेंटर के अनुसार 12000 से अधिक लोगों ने सिक्स सिग्मा के मिशन जिंदगी-कोविड-19 कोर्स का अध्ययन करके सर्टिफिकेट प्राप्त किए।
आगे रही यूथ रेडक्रॉस
वैश्य बीएड कॉलेज की छात्राओं और अध्यापिकाओं ने लॉकडाउन में सेवा कार्य करती रहीं। मास्क, गमछे, परने, साबुन, सैनिटाइजर और खाद्य पदार्थ बांटने के साथ प्रचार सामग्री बांटने के अलावा ऑनलाइन तरीकों से जागरुकता मुहिम भी चलाई। छात्राओं ने धन संग्रह करके प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने 21 हजार और कॉलेज प्रबंधन ने 51 हजार रुपये का योगदान मुख्यमंत्री कोरोना राहत कोष में दिया। छात्राओं ने सैकड़ों लोगों के मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करवाया। बेजुबान जानवरों को खाना खिलाया। भारत विकास परिषद व बुल्लड़ पहलवान अखाड़ा समेत शहर की तमाम संस्थाएं भी सेवा कार्य करने में जुटी रहीं।