बहादुरगढ़। प्राचीन कारीगर एसोसिएशन द्वारा नाबार्ड के सहयोग से लगाया गया दस दिवसीय हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक उत्सव रविवार को समाप्त हो गया। मेले में विभिन्न प्रदेशों के आए 70 से हस्तशिल्पी और कलाकार ने अपने हुनर के प्रदर्शन किया। ये कलाकार अगले साल आने का वादा कर वापस लौटे। अंतिम दिन जबर्दस्त भीड़ उमड़ी।
देशभर के हस्तशिल्प क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजे गए ये कलाकार बहादुरगढ़ में 8वीं बार आए थे। । इस बार के मेले में 17 प्रदेशों के कलाकारों ने हिस्सा लिया। रविवार शाम तक भी मेले में खरीदारों की भीड़ जमी रही। दस दिन तक चलेे इस हस्तशिल्प मेले का एक भाग ग्रामीण माहौल और ग्रामीण संस्कृति से भी रु-ब-रू कराता रहा। मेले में लगे विभिन्न स्टाल हर क्षेत्र की कलाकृतियां से लोगों को परिचित कराते रहे। इन स्टालों में पश्चिम बंगाल और असम के बांस और बेंत की वस्तुएं, पूर्वोत्तर राज्यों के वस्त्र, उड़ीसा एवं तमिलनाडु के अनोखे हस्तशिल्प देखे मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और कश्मीर के आकर्षक परिधान, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और चंदन की लकड़ी के हस्तशिल्प भी यहां देखे पंसद किए गए।
बहादुरगढ़ के बोंदवाल परिवार के काष्ठ शिल्प, खुर्जा से आए जहीरुद्दीन की पॉटरी आइटम, बहादुरगढ़ से ही आई अर्चना पंवार की क्ले से जुड़ी कलाकारी के अलावा मुरादाबाद की पीतल से बनी आकर्षक वस्तुओं को देख शहर के लोग दंग रह गए। मेले में भाग लेने वाले सभी हस्तशिल्पी बहुत खुश नजर आ रहे थे। दसों दिन तक शानदार मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। आखरी दिन प्राचीन कारीगर एसोसिएशन की ओर से सभी शिल्पियों को सम्मानित किया गयाष