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Jhajjar-Bahadurgarh News: ग्रह योग का महासंयोग, बाजार में रहेगा मां लक्ष्मी का प्रभाव

Wed, 19 Apr 2023 01:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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बहादुरगढ़। अक्षय तृतीय का पर्व शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। बाजार में इसकी तैयारी शुरू हो गई हैं। तृतीया तिथि 22 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर आरंभ होगी। इस दिन शुभ कार्य किए जाते हैं।
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लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं।



12 साल बाद आयुष्मान योग का बन रहा संयोग

वैशाख मास की अक्षय तृतीया पर एक साल बाद आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। यह योग आयु व आरोग्य प्रदान करने वाला माना गया है। ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि इस योग में भगवान विष्णु व शिव का पूजन व दान करने से आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। शनिवार के दिन कृतिका नक्षत्र, आयुष्मान योग व वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में अक्षय तृतीया और परशुराम जी का प्रकट उत्सव मनाया जाएगा। बृहस्पति वर्ष गणना से देखें तो 22 अप्रैल के दिन में बृहस्पति का राशि परिवर्तन हो रहा है। मीन राशि से मेष राशि में बृहस्पति प्रवेश करेंगे। यह स्थिति भी अनुकूल मानी जाती है। सूर्य के साथ गुरु की युति श्रेष्ठ बताई गई है। इस दृष्टि से यह योग 12 वर्ष बाद बन रहा है। इसमें किया गया दान अक्षय बताया जाता है।
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कई योग में खरीदारी होगी शुभ

21 अप्रैल को सुबह 11 बजे से 22 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह 9 बजकर 30 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। ज्योतिषाचार्य प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि 22 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 30 मिनट से 23 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 8 बजकर 22 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। 22 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक त्रिपुष्कर योग का निर्माण होगा। 22 अप्रैल को ही सुबह 11 बजकर 24 मिनट से 23 अप्रैल को सुबह 5 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग साथ में निर्मित होंगे।



सूर्य और चंद्रमा दोनों इस दिन अपनी उच्च राशि में विराजमान

साल में एक यही ऐसा दिन आता है जब सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में गोचर कर रहे होते हैं। पंडित सियाराम के अनुसार इस बार भी सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा वृष मेें उच्चस्थ हैं।
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