बहादुरगढ़। सरकार को यह मुगालता नहीं रखना चाहिए कि किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है। असलियत यह है कि किसान अगले छह महीने की तैयारी कर रहे हैं। इस बार चंदा भी हजारों में नहीं लाखों रुपये में दे रहे हैं। जल्द ही बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच जाएंगे। यह बातें भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहीं। उगराहां ने वीरवार को नयागांव चौक के पास यूनियन द्वारा आयोजित सभा में किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि सरकार को ये नहीं सोचना चाहिए कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन विलुप्त होने के कगार पर है। सच ये है कि गेहूं की फसल का काम निपटाने के बाद आंदोलकारियों ने अगले छह महीनों के लिए संसाधन जुटाने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि लड़ाई अब एक युद्ध बन गई है। इस बार पंजाब के लोग आंदोलन के लिए हजारों नहीं, लाखों रुपये में फंड दे रहे हैं। स्थिति ये है कि किसान बड़ी धनराशि दान कर व्हट्सएप ग्रुपों में रसीदें डाल रहे हैं। पंजाब में बड़ी संख्या में गांवों से दिल्ली आने की तैयारी चल रही है। आने वाले दिनों में, बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी फिर से दिल्ली मोर्चा में शामिल होंगे। कोरोना के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसी भी धरने के दौरान कोई दवा, कोई स्वास्थ्य सुविधा और कोई संगोष्ठी आयोजित नहीं की गई।
युवा नेता दीना सिंह सिविया ने कहा कि मुकेश अंबानी की कमाई बढ़कर 90 करोड़ रुपये प्रति घंटा हो गई है। हमारे किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी अपनी नौकरी खो रहे हैं। कैसे आए दिन ये कॉर्पोरेट घराने किसानों और मजदूरों का खून चूसते हैं, आर्थिक खाई चौड़ी हो रही है।
लुधियाना जिले के युवा नेता गुरप्रीत सिंह नूरपुरा ने कहा कि काले कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के कारण हालिया चुनाव परिणाम दिखा रहे हैं कि भाजपा दिन-प्रतिदिन पतन की ओर बढ़ रही है। साफ है इस संघर्ष में किसानों की शहादत व्यर्थ नहीं गई। सरकार को कानून निरस्त करने होंगे।
बठिंडा के युवा नेता राजविंदर सिंह राजू ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले लोगों को बताया गया था कि अच्छे दिन आएंगे, अच्छे दिन नहीं आए। दिल्ली की सीमाओं पर मच्छरों द्वारा किसानों का खून चूसने वाले दिन जरूर आ गए। हरबंस सिंह, बहादुर सिंह, कुलदीप सिंह और गुरदेव सिंह ने भी मंच से संबोधित किया।