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सरकार छलावा कर रही, किसान लॉकडाउन को नहीं मानेंगे : विकास सीसर

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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। हालांकि मुख्य सभा में किसानों की संख्या अब पहले की तरह अधिक नहीं रहती। गर्मी और गेहूं की फसल कटाई का काम भी भीड़ कम होने के कारण माने जा रहे हैं। मंगलवार को भारतीय किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष विकास सीसर समेत कई लोगों ने सभा में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना के बहाने छलावा कर ही है। लॉकडाउन के बहाने पूरे देश को जेल बनाना चाह रही है। दिल्ली में लॉकडाउन लगाना भी सरकार की इस नीति का हिस्सा है, लेकिन हरियाणा-पंजाब में लॉकडाउन लगाया गया तो किसान नहीं मानेंगे।
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किसान नेता विकास सीसर ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन के चले हुए पूरे पांच महीने हो चुके हैं लेकिन सरकार ने हमारी कोई नहीं सुनी है। हमें कानून वापसी के मुद्दे को बदलकर इस सत्ता को ही बदलना होगा। यह सरकार पूरे देश को जेल बनाने का काम कर रही है। किसानों से डरकर दिल्ली में लॉकडाउन लगा दिया। हरियाणा और पंजाब में लॉकडाउन इसलिए नहीं लगाया कि यहां किसान बैठे हैं जो उठने वाले नहीं है। किसी भी बॉर्डर पर बैठा कोई भी आंदोलनकारी किसान कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है।
देश में कोरोना फैलने का दोष सरकार व राजनीतिक नेताओं को देते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से सरकार को किसी भी राज्य में चुनाव नहीं कराने थे। चुनाव वाले राज्यों में कोरोना फैला है तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि इन नेताओं को जेल में डाल दे। विकास ने कहा कि गुजरात के जिस व्यक्ति को अमेरिकी सरकार ने वीजा नहीं दिया था, उसको हमारी जनता ने देश की बागडोर दे रखी है। पिछले लॉकडाउन में हरियाणा के गांव-गांव में लोगों को लाठी लेकर बैठा दिया था। ऐसे हालात पैदा कर दिए थे कि किसी को भी गांव में नहीं घुसने दिया। लेकिन अब हम इस तरह के लॉकडाउन को नहीं मानेंगे। हम मास्क और वैक्सीन का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोरोना बीमारी से बचना है तो हमारे आंदोलन में आ जाओ, किसी भी मजदूर, किशान, व्यापारी को कहीं भी बाहर जाने की जरूरत नहीं है हम उनको यहां भोजन और रहने को देंगे। इस लड़ाई को जीतने के लिए किसान नेताओं को इस कानून से ऊपर उठकर सोचना पड़ेगा। किसान ऑपरेशन क्लीन का डटकर विरोध करेंगे।
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