आगजनी से बचने के लिए केवल फायर सिलिंडर रखे हुए हैं उनमें से भी कई सरकारी कार्यालयों में फायर सिलिंडर की डेट एक्सपायर हाे चुकी है तो कई सरकारी कार्यालयों में फायर सिलिंडर तक नहीं रखे गए हैं। ऐसे में यदि कोई आगजनी की बड़ी घटना होती है तो उस समय सुरक्षा के लिए केवल दमकल विभाग की गाड़ियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
शहर के गुरुग्राम रोड पर स्थित लघु सचिवालय की दो बिल्डिंग हैं। इन दोनों ही बिल्डिंग में आगजनी से बचाव के लिए कोई सेंट्रल सिस्टम नहीं है। इन दोनों बिल्डिंग में फायर सिलिंडर लगाए गए हैं। हर फ्लोर पर दो से तीन फायर सिलिंडर लगे हुए हैं। इनको हर साल रिफिल करवाकर काम चलाया जाता है।
यही हाल सरकारी अस्पताल का हैं। यहां प्रतिदिन 1,300 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं और 500 के लगभग स्टाफ भी हैं। उसके बावजूद आगजनी से सुरक्षा के लिए निर्भरता केवल फायर सिलिंडरों पर हैं। यही हाल जिला परिषद कार्यालय, कृषि विभाग, बीडीपीओ कार्यालय, रेडक्रॉस का है, जहां पर फायर सिलिंडर है ही नहीं।
फाइलों में अटके प्रोजेक्ट
झज्जर के सरकारी अस्पताल में भी सेंट्रल फायर फाइटिंग सिस्टम लगना है लेकिन अब तक इसकी मंजूरी नहीं मिल सकी है। विभाग की तरफ से प्रोजेक्ट बनाकर मंजूरी के लिए काफी माह से भेजा हुआ है। इसके अलावा बेरी के सरकारी अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम लगना है जिसका अब तक 70 प्रतिशत ही काम पूरा हुआ है। इस पर भी लगभग 55 लाख रुपये की राशि खर्च होनी है।
15jjrp24- सिविल अस्पताल जहां पर सेंट्रल फायर सिस्टम नहीं है। संवाद