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जनरल के गांव में कल से मनेगी दिवाली, बजेंगे ढोल

Wed, 30 Jul 2014 12:32 AM IST
jhjhar
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 बेरी से रोहतक वाया कबूलपुर जाने वाले मार्ग से अप्रोच मार्ग पर बसा गांव बिसान इन दिनों सुर्खियों में है। आर्मी को सैकड़ों अफसर देने वाले बिसान के बेटे जनरल दलबीर सिंह सुहाग अब 31 जुलाई को देश की सेना का सर्वोच्च पद संभालने जा रहे हैं। इससे गांव के जर्रे-जर्रे में खुशी का माहौल हैै। गांव में रह रहे सुहाग के माता-पिता के अलावा पड़ोसी और गांव के युवा भी उत्साहित हैं और इस घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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 उनके माता-पिता तो अपने लाडले को सेनाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठते हुए देखने के लिए जल्द ही दिल्ली जाएंगे। मां ईशरी देवी भरे हुए गले से कह रही हैं कि वे अपने लाडले का चूरमा खिलाकर मुंह मीठा करवाएंगी क्योंकि दलबीर को बचपन में चूरमा बहुत पसंद था। इसके अलावा गांव के दर्जनों व्यक्तियों को सुहाग ने न्यौता भेजा है। वहीं, एक अगस्त को गांव में जश्न की तैयारियां की गई हैं।

 
माता-पिता दिल्ली रवाना
जनरल दलबीर सुहाग के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए सुहाग के माता-पिता मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।  वे 31 जुलाई दोपहर साढ़े 12 बजे पदभार संभाल लेंगे, जबकि एक अगस्त को सुबह 9 बजे आर्मी की एक आफिशियल सेरेमनी होगी जिसमें इन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। अपने बेटे के इस समारोह को देखने के लिए जहां गांव के हर मोहल्ले से तीन-चार लोगों के दिल्ली पहुंचने की तैयारियां कर रखी हैं।
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दलबीर सुहाग द्वारा भी गांव के बुजुर्गाें व अन्य लोगों को इस समारोह में शिरकत करने का न्यौता अपने भाई धर्मबीर के हाथों भेजा गया है। मंगलवार को देर शाम दलबीर सुहाग के भाई धर्मबीर अपने पिता रामफल व मां ईशरी देवी को लेने के लिए गांव बिसान पहुंचे। धर्मबीर का कहना था कि उनका पूरा परिवार व गांव के हर ठोले से तीन-चार लोग, रिश्तेदार व अन्य सगे संबंधी 31 जुलाई को दिल्ली में ही एकत्रित होंगे और बाद में वह 1 अगस्त के समारोह में शामिल होंगे।

 सुहाग के चचेरे भाई राजबीर का कहना है कि वैसे तो दलबीर सुहाग के इस गॉर्ड ऑफ आनर के समारोह में शामिल होने के लिए गांव बिसान से काफी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे, लेकिन जो लोग यहां रहेंगे उन्होंने भी इस खुशी को एक तरह से पर्व के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। एक अगस्त को जहां गांव में आतिशबाजी चलाने का विशेष कार्यक्रम तय किया गया है वहीं इस मौके पर आस-पास के गांवों के लोगों को भी मनाए जाने वाले जशभन में भाग लेने का न्यौता भेजा गया है। उम्मीद यही है कि जिस समय दलबीर आर्मी चीफ की शपथ लेंगे, उस समय पूरे गांव जशभन में सराबोर होगा।


पिता चाहते हैं बेटा आर्मी में ट्रेनिंग को करे मजबूत
दलबीर सिंह सिहाग के पिता 84 वर्षीय रामफल सिहाग स्वयं 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों में देश के लिए लड़ चुके हैं। वे चाहते हैं कि बेटा सबसे पहले देश की सेना की ट्रेनिंग को मजबूत करे। जिस सेना की ट्रेनिंग अच्छी होगी, जवानों का मनोबल उतना ही ऊंचा होगा।

 हमें तो विश्वास है कि दलबीर सिंह देश की सेना की ताकत को बढ़ाएंगे। चाइना और पाक के हमलों और गतिविधियों के बारे में वे कहते हैं कि भारत को मुंह तोड़ जवाब देना आता है। दलबीर सुहाग के आर्मी चीफ बनने की खुशी में वे कहते हैं कि ये तो सबके लिए खुशी की बात है। शुरू से ही वह होनहार रहा है। सेना में जाने का जज्बा पहले से रहा है। इतनी बुलंदी छू लेगा यह तो नहीं सोचा था, मगर आज जहां पहुंचा है सच्चाई के दम पर पहुंचा है। चीफ बनने पर रगड़ा भी हुआ, पर सच तो जीत की होती है। देर से ही सही जीत तो हुई है।
 
दूध दही और चूरमे के शौकीन रहे हैं दलबीर सुहाग
जनरल दलबीर सुहाग की माता ईशरी देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला हैं। भजन गाने में बहुत विश्वास रखती हैं। बचपन की दलबीर सिंह की यादों के बारे में वे कहती हैं कि बचपन में साबुन इनाम में मिलता था। ताकि बच्चे नहा-धोकर स्वच्छ रहें। अब 59 साल का हो रहा है, अब ज्यादा बातें याद नहीं हैं।

 दलबीर सिंह के बचपन के शौक के बारे में वे कहती हैं कि गोला फेंकना उसे पसंद था। दूध-दही और चूरमा खाने का उसे खास शौक रहा है। अब भी जब चीफ बन जाएगा तो मैं उसे चूरमा खिलाऊंगी। मां ईशरी देवी कहती हैं कि उनका मन तो गांव में लगता है। हालांकि वे अपने बेटों के पास भी चली जाती हैं, मगर मन गांव में लगता है। 
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