बहादुरगढ़। कनेक्शन लेने के शीघ्र बाद गैस महंगी होने के कारण अपने उद्योग में ईंधन के लिए पीएनजी की खपत नहीं कर पाने वाले उद्यमी पर गैस कंपनी ने लगभग 60 लाख रुपये मिनीमम गारंटेड ऑफटेक (एमजीओ) लगाया है। अब उद्यमी राशि माफ करवाने के लिए परेशान है। कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) ने कंपनी के इस रवैये को दादागिरी बताते हुए ऐसी मनमानी बंद करने की मांग की है।
कोबी के सदस्य उद्यमी अमित गोयल बहादुरगढ़ के गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र में समर्थ रैक्सीन प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्टरी का संचालन करते हैं। फैक्टरी में रैक्सीन बनती है। सर्दी के मौसम के अलावा कुछ अन्य दिनों में उद्योगों पर प्रदूषण रहित ईंधन प्रयोग करने के लिए एनजीटी का दबाव रहता है। इसलिए गोयल ने वर्ष 2022 में अपनी फैक्टरी के लिए हरियाणा सिटी गैस (एचसीजी) से कनेक्शन ले लिया था। कंपनी की शर्तों के अनुसार इसके लिए 30 लाख रुपये बैंक गारंटी और लगभग पांच लाख रुपये मीटर चार्ज भी दिया। गोयल ने बताया कि मार्च 2022 में जब उन्होंने कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो गैस का भाव 37 रुपये प्रति किलो लिखा था, लेकिन नवंबर में जब आपूर्ति शुरू की तो 66 रुपये की दर से शुरू की। इस तरह गैस की कीमत में अचानक भारी वृद्धि कर दी। इससे उन्हें एचसीजी की पीएनजी प्रयोग करना मुश्किल हो गया। इतनी महंगी गैस को फैक्टरी में ईंधन के लिए प्रयोग करते तो उत्पादन लागत बढ़ सकती थी। इसलिए उन्होंने एचसीजी की गैस इस्तेमाल न करने का फैसला लिया। वह वैकल्पिक ईंधन की तलाश करने लगे। वह अप्रैल, मई व जून 2023 में गैस का प्रयोग नहीं कर पाए तो गैस एजेंसी ने उन पर 59,11,630 रुपये 56 पैसे एमजीओ लगा दिया है। गोयल ने इसको नाजायज बताते हुए खत्म करने की मांग की है।
कोबी के महासचिव अशोक मित्तल ने उद्यमियों को गैस कनेक्शन लेने से पहले सभी तथ्यों को अच्छी तरह समझ लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जल्दी में कनेक्शन लेने से कई वास्तविक तथ्य छिपे रह जाते हैं। गैस कंपनी ऐसे अनुचित तरीके से बहुत बड़ा एमजीओ लगाने से नहीं चूकती। मित्तल ने कहा कि इस घटना को ध्यान में रखते हुए एचसीजी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी खंडों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।
एचसीजी ने कनेक्शन लेने के बाद गैस के दाम 37 से बढ़ाकर 66 रुपये कर दिए। इतनी महंगी गैस प्रयोग नहीं कर पाया। इस पर एचसीजी 60 लाख रुपये एमजीओ लगा दिया। यह रवैया एचसीजी की दादागिरी को दर्शाता है। इसलिए इसकी शिकायत सरकार के उच्च अधिकारियों को भी की है। उद्यमियों को इस तरह मारा जाएगा तो उद्योग कैसे चलेंगे।
प्रवीण गर्ग, प्रधान, कोबी
कंपनी ने समर्थ रैक्सीन प्राइवेट लिमिटेड से कुछ भी गलत नहीं मांगा है। केवल उसी के मुताबिक मांगा जा रहा है, जो नियम और शर्तें कनेक्शन लेने के वक्त तय हुईं थीं। फर्म की ओर यह राशि मिनीमम गारंटेड ऑफटेक (एमजीओ) की बकाया बनती है।
-पंकज चौहान, मार्केटिंग मैनेजर, एचसीजी