सिविल अस्पताल में सोमवार को ऑक्सीजन की कमी के कारण एक नवजात की जान करीब डेढ़ घंटे तक अटकी रही। ऑक्सीजन सिलेंडर से युक्त एंबुलेंस की व्यवस्था होने पर नवजात को रोहतक पीजीआई ले जाया गया। ऐसी लचर व्यवस्था ने अस्पताल व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी।
गांव मातनहेल की नीलम ने कई दिन पहले सिविल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। सोमवार की सुबह अचानक बच्चे की तबीयत खराब हो गई। असल में उसे सांस लेने में दिक्कत थी। बाद में बच्चे को अस्पताल से रोेहतक पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया। नवजात के पिता बिजेंद्र ने बताया कि उसे स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में ऑक्सीजन का सिलेंडर नहीं है। एक सिलेंडर बचा है, जिसमें कुछ देर का ही आक्सीजन है। इसके बाद नवजात को आक्सीजन तो दी गई, लेकिन कभी भी खत्म हो सकने वाले सिलेंडर से। वहीं इन सबके बीच अस्पताल प्रबंधन का दावा रहा कि तीन दिन पहले ही अस्पताल में ऑक्सीजन का स्टॉक आया था।
एंबुलेंस ने बढ़ाई दिक्कत
ऑक्सीजन के अभाव में नवजात की जान हक में फंसा देख परिजन भी सकते में आ गए। परेशानी तब और बढ़ गई, जब पता चला कि अस्पताल में ऐसी कोई एंबुलेंस नहीं है, जिसमें सिलेंडर की व्यवस्था हो। यहां दो एंबुलेंस थी, लेकिन दोनों ही उस पर इमरजेंसी केस के लिए गई हुई थी। नवजात के परिजनों ने अस्पताल के ऑक्सीजन सिलेंडर को रोहतक पीजीआई तक देने को कहा, लेकिन स्टाफ ने वहां तक की ऑक्सीजन न होने की बात कह मना कर दिया। परिजन नवजात को लिए करीब डेढ़ घंटे तक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए अस्पताल में बदहवाश हालत में घूमते रहे।
बोले अधिकारी-स्टॉक पूरा
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। ऐसी कोई दिक्कत थी भी तो स्टाफ ने एमएस तक को इस बारे में सूचना देना उचित नहीं समझा। एमएस डॉ. एनके गर्ग ने बताया कि तीन दिन पहले ही सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन की डिलीवरी आई है। वे कैसे मान लें कि बच्चे के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं था। दूसरी तरफ स्टाफ बच्चे के परिजनों को अस्पताल में रखे खाली ऑक्सीजन सिलेंडर दिखाता रहा।