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कई एकड़ में फैले स्क्रैप में लगी आग से आसमान में घंटों छाया रहा जहरीला धुआं

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बहादुरगढ़। शहर में सेक्टर-10 के सामने बाईपास के निकट कई एकड़ जमीन में फैले रबड़-प्लास्टिक-रैक्सीन के स्क्रैप में वीरवार सुबह आग लग गई। जिससे आसमान में कई घंटे तक काले जहरीले धुएं के गुबार छाए रहे। स्क्रैप के इन्हीं ढेरों के बीच झुग्गियां बनाकर रह रहे मजदूरों के परिवारों ने भागकर अपनी जान बचाई।
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बाईपास पर लघु सचिवालय मोड़ के सामने खेती की कई एकड़ जमीन में मजदूरों के 40 से अधिक परिवार रहते हैं। श्रमिक फुटवियर फैक्ट्रियों से रैक्सीन आदि की स्क्रैप और केमिकल आदि खरीद कर उसे बेचने का काम करते हैं। अन्य दिनों की तरह बुधवार रात को सभी परिवार भोजन आदि करके सो गए। अलसुबह रैक्सीन स्क्रैप के एक ढेर में आग लग गई। नजदीक ही खेत में अपनी फसल की सिंचाई कर रहे एक किसान की नजर स्क्रैप के ढेर में लगी आग पर पड़ी। इस पर वह भागा-भागा झुग्गियों में आया और शोर मचाते हुए यहां सो रहे मजदूरों को जगाया। अगर किसान मजदूरों को नहीं जगाता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। जब तक आग पर काबू पाया जाता तक वह विकराल रूप धारण कर चुकी थी।
आग लगने की इस घटना से वातावरण में भयंकर प्रदूषण फैल गया। वहीं आग से सभी परिवारों में भगदड़ मच गई। सभी ने पहले अपने बच्चों को निकाल खाली खेत में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और फिर झुग्गियों में रखे अपने घरेलू सामान को निकालकर दूर रखा। अपनी झुग्गी जलने से परेशान बैठे परिवार के मुखिया श्रमिक महरुद्दीन ने बताया कि उनके कपड़े और काफी सामान आग में जल गया। फसल की सिंचाई कर रहे किसान के ट्यूबवेल से पाइप द्वारा पानी लाकर आग बुझाने की कोशिशें शुरू की गईं और साथ ही फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया गया। स्क्रैप के ढेरों के बीच जगह को खाली करके आग को फैलने से रोकने की कोशिश की गई। लेकिन सारा स्क्रैप शीघ्र ज्वलनशील होने की वजह से आग विकराल रूप लेती गई। सूचना पर दमकल की गाड़ियां व शहर थाना पुलिस की भी तीन टीमें घटना स्थल पर पहुंच गई। नजदीक ही बाईपास पर पड़ाव डाले बैठे किसान आंदोलनकारियों की भीड़ लग गई। वहीं फायर ब्रिगेड को आग बुझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल कर्मियों ने करीब छह घंटे में आग पर काबू पाया। लेकिन इसके बावजूद स्क्रैप के ढेरों के नीचे से धुआं निकलता रहा। वहीं आग लगने से आसपास के इलाके में प्रदूषण बहुत खतरनाक हो गया। बाईपास पर अपने पड़ाव में मौजूद आंदोलनकारी किसानों को प्रदूषण से सबसे ज्यादा परेशानी हुई। पंजाब के बठिंडा के बुजुर्ग किसान सुखदेव सिंह ने बताया कि काले धुएं की वजह से उनका सांस लेना मुश्किल हो गया। घटनास्थल के सबसे नजदीक की कॉलोनी दिल्ली के सत्यमपुरम के लोग भी धुएं से परेशान हो गए। यहां के निवासी राधेश्याम ने बताया कि घरों की छतों पर धुएं के कण गिर गए। छत पर सूख रहे कपड़े खराब हो गए, जिन्हें फिर से धोना पड़ा। इसके अलावा सुबह के समय सैर को जाने वाले एडवोकेट राकेश और उनके साथी सुभाष वर्मा आदि को जहरीले धुएं की वजह से अपना रूट बदलना पड़ा।
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