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सब्जी मंडी में लगी आग, लाखों का नुकसान

Thu, 08 Oct 2015 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़
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शहर के मुख्य सब्जी मंडी परिसर में लगी कई टाटियों (शैड) में रसोई गैस रिसाव से आग लग गई। बांस की टाटियां होने से आग दूर-दूर तक फैलती चली गई और उसने सात टाटियों को अपनी चपेट में ले लिया।
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टाटियों में खाली व टमाटरों से भरी कैरेट जल गई, वहीं दो चाय विक्रेताओं की रेहड़ियां व अन्य सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। सब्जी विक्रेता की बाइक भी आग की चपेट में आ गई।

आग की लपटें तेज होने के कारण उसके साथ लगते स्कूल के कमरों तक भी आग पहुंच गई। जिसके कारण यहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया। हादसे से बचने के लिए स्कूल संचालक ने समय से पहले ही छुट्टी कर बच्चों को घर भेज दिया। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया।
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सब्जी मंडी के एक कोने में विजया सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पीछे लगती दीवार के साथ कुछ सब्जी विक्रेताओं के टाटियों से बने गोदाम हैं।

यहीं दो लोग रेहड़ियों पर टी-स्टाल चलाते हैं। बुधवार दोपहर पौने दो बजे चाय विक्रेता सुरेश अपने चूल्हे का एलपीजी सिलेंडर बदल रहा था तो गैस रिसने लगी। माचिस की तिल्ली जला वह स्टोव बर्नर के पास ले गया तो गैस रिसाव की वजह से आग भड़क उठी।

उसने बुझाने का प्रयास भी किया लेकिन काबू में नहीं आई। देखते ही देखते कई टाटियों में आग लग गई। तमाम गोदामों में प्लास्टिक की पेटियां रखी थीं, इसलिए आग जल्द भड़क गई। घटना स्थल से से कुछ ही फुट दूरी पर विजय स्कूल की बिल्डिंग है।

वहां तक आग पहुंचने लगी थी। स्कूल भवन में धुआं ही धुआं हो गया। स्कूल प्रबंधक ने तुरंत एहतियात बरतते हुए सभी बच्चों को कमरों से बाहर निकलवाया और समय से करीब आध घंटे पहले ही छुट्टी कर दी। चाय विक्रेता श्रवण ने बताया कि आग के कारण उसे भी हजारों का नुकसान हुआ।

सब कुछ हुआ स्वाहा
आढ़ती संजय ने बताया कि टाटियों से बने उसके गोदाम में प्लास्टिक की करीब 650 कैरेट रखी थी। इसमें से 50 कैरेट में टमाटर भरे थे। घटना में सभी कैरेट जल गए।

बिजली का सामान, तख्त, मेज, बही खाते, एक मोटर साइकिल व कई रेहड़ियां भी नष्ट हो गईं। सैकड़ों किलोग्राम टमाटर भी नष्ट हो गए। सब्जी विक्रेता संजय व संदीप ने बताया कि घटना से उन्हें काफी नुकसान हुआ है। संजय का कहना है उसे करीब चार लाख रुपये का नुकसान हो गया।

जिंदा जले पांच पिल्ले
आग लगने की घटना में पांच पिल्ले जिंदा जल गए। इन पिल्लों की अभी आंखें भी नहीं खुली थी। इस घटना से हर किसी को दुख हुआ। इन पिल्लों की मां उन्हें ढूंढने के लिए काफी देर तक इधर उधर भटकती रही। 

टल गया बड़ा हादसा
जिस रसोई गैस सिलेंडर से रिसाव हुआ, अगर वह फट जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। यहां एक नहीं दो-तीन छोटे सिलेंडर भी रखे थे। इन सिलेंडरों तक भी आग पहुंच गई थी। सब्जी विक्रेताओं व दमकल कर्मियों ने किसी तरह इन सिलेंडरों को आग से दूर किया। तब जाकर लोग खुद को सुरक्षित मानने लगे।

सहमे रहे बच्चे
स्कूल के कमरों तक आग की लपटें देखकर बच्चे भी सहम गए। अध्यापकों ने तुरंत अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आग के चलते कई खिड़कियों में लगे शीशे चटक गए तो लोहे की एंगल भी मुड़ गई। स्कूल स्टाफ ने एक कमरे में रखे सिलेंडरों को सुरक्षित जगह पहुंचाया।
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