बहादुरगढ़। नगर परिषद बहादुरगढ़ के बैंक खाते से प्रधानमंत्री आवास योजना के करीब 89 लाख रुपये धोखाधड़ी से निकलने के मामले में तत्कालीन सेक्शन ऑफिसर परमजीत जाखड़ के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाएगी। ये आदेश मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई सीएम विंडो की समीक्षा बैठक में दिए गए हैं।
सीएमम विंडो और हरपथ के कार्यों की समीक्षा बैठक वीरवार को चंडीगढ़ में हुई, जिसमें मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेश्वर दयाल शर्मा और परियोजना निदेशक (सीएमजीजीए) डॉ. राकेश गुप्ता मुख्य रूप से मौजूद थे।
ओएसडी शर्मा ने बताया कि बैठक में गबन के तीन मामलों पर विचार-विमर्श कर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश पारित किए गए। इन मामलों में नगर परिषद बहादुरगढ़ में अगस्त 2020 में हुआ 88 लाख 68 हजार रुपये का मामला प्रमुख है। शर्मा ने बताया कि बैठक में इस केस में तत्कालीन एसओ परमजीत जाखड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।
जानकारी के लिए नगर परिषद के खाते से अगस्त में 88 लाख 68 निकाले गए, मगर अधिकारियों को इसका पता भी नहीं लगा। किसी भी अधिकारी ने खाते चेक नहीं किए। जबकि खाते संभालने की जिम्मेदारी एकाउंट ब्रांच के साथ एसओ की होती है। बताया जा रहा है कि अगर जुलाई के अंत में खातों की जांच हो जाती तो इतनी बड़ी राशि नप के खाते से नहीं निकल पाती और यह मामला पहले की पकड़ में आ जाता।
अब मुुख्यमंत्री की ओर से एफआईआर दर्ज करने के आदेश से अधिकारियों की धड़कने बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने तब कहा था कि सभी असली चेक नगर परिषद में मौजूद हैं। उक्त राशि किसी राम आश्रय के खाते में ट्रांसफर हुई है। ये हेराफेरी क्लोन चेक से की गई और परिषद के कार्यकारी अधिकारी अपूर्व चौधरी व नगर परिषद चेयरपर्सन शीला राठी के फर्जी हस्ताक्षर करके राशि निकाली गई। 23 जुलाई से 17 अगस्त तक 8 चेकों के माध्यम से उक्त राशि निकाली गई है।
गबन का मामला उजागर होने के बाद नगर परिषद अधिकारियों ने शहर थाना बहादुरगढ़ में एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस ने संबंधित बैंकों से मामले का रिकॉर्ड भी लिया। पुलिस दिल्ली और बिहार भी गई थी। बिहार में राम आश्रय नामक व्यक्ति की तलाश की गई। इसी व्यक्ति के खाते में यह रकम गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के फंड वाले नगर परिषद बहादुरगढ़ के एक्सिस बैंक खाते से अगस्त 2020 में नगर परिषद के खाते से राम आश्रय नामक व्यक्ति के नाम से अलग-अलग दिनों में कुल 88 लाख 68 हजार रुपये निकाले गए। जब 21 अगस्त 2020 को 9 लाख 93 हजार रुपये का चेक बैंक में क्लीयरेंस के लिए आया तो यह मामला पकड़ में आया। उक्त चेक की क्लीयरेंस नगर परिषद अधिकारियों ने बैंक प्रबंधक को बोलकर रुकवाई।