झज्जर। बहादुरगढ़ निवासी राशि गुलिया ने पिता राजेश गुलिया के सपने को पूरा करने के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया। बीमारी के चलते पिता ने बीच में ही क्रिकेट छोड़ दिया था। वहीं अब राशि गुलिया का सपना भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेलने का है।
वर्ष 2020 में 10 साल की उम्र में राशि ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। वह क्रिकेट के खेल में मेहनत कर रही है। फिलहाल श्री राम नारायण क्रिकेट अकादमी और चैंपियन क्रिकेट अकादमी में क्रिकेट का अभ्यास कर रही हैं। राशि के पिता बहादुरगढ़ की चैंपियन क्रिकेट अकादमी में खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं। माता ज्योति रानी गृहिणी हैं।
हरियाणा की कप्तान रह चुकीं राशि
राशि गुलिया वर्ष 2024-25 में अंडर-15 महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में हरियाणा की टीम से खेल चुकी हैं। इसके साथ हरियाणा टीम की कप्तान भी रही हैं। वर्ष 2025-26 में राशि हरियाणा अंडर-19 महिला के कैंप में शामिल रहीं लेकिन टीम में खेलने का मौका नहीं मिला।
पढ़ाई में भी टॉपर है राशि
राशि खेल के साथ-साथ पढ़ाई में टॉपर हैं। पिछले वर्ष हुई दसवीं की परीक्षा में राशि ने 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वहीं इस बार 11वीं की पढ़ाई में भी राशि गुलिया परीक्षाओं में टॉप पर रहीं।
प्रतिदिन करीबन 500 कैच पकड़ती हैं
भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए राशि गुलिया लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं। वह विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। आठ से 9 घंटे क्रिकेट का अभ्यास करती हैं।। इसके साथ प्रतिदिन करीबन 500 कैच पकड़ती हैं।
हरियाणा व सौराष्ट्र के कैंप में रहे राजेश गुलिया
पिता राजेश गुलिया हरियाणा व सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी कैंप का हिस्सा रहे हैं। वर्ष 2007 में सौराष्ट्र रणजी ट्रॉफी के कैंप का हिस्सा रहे। इसके बाद वर्ष 2016 में हरियाणा रणजी ट्रॉफी के कैंप का हिस्सा रहे हैं। दोनों ही टीमों से राजेश को खेलने का मौका नहीं मिला।
बेटी के लिए न रहे कोई कमी
पिता ने बताया कि जो कमी उनके समय में रह गई थी वो बेटी के लिए ना रहे, इसके लिए वह पूरी मेहनत कर रहे हैं। बीमारी के चलते उन्होंने बीच में क्रिकेट छोड़ दिया था जिसके बाद वर्ष 2010 में खिलाड़ियों को क्रिकेट की कोचिंग देनी शुरू की। वह पहले तेज गेंदबाज के रूप में दोनों टीमों के कैंपों में शामिल हुए थे।
पिता का सपना पूरा करना लक्ष्य
क्रिकेट खिलाड़ी राशि ने बताया कि उनके पिता ने बीमारी के चलते बीच में ही क्रिकेट छोड़ दिया। पिता का सपना हरियाणा और भारत के लिए क्रिकेट खेलने का था लेकिन वह सपने को पूरा नहीं कर सकें। अब उन्होंने मन बनाया है कि वह पिता के सपने को पूरा करेंगी। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं।