बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के नेताओं ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को बैठे 160 दिन हो गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने जानबूझकर चुप्पी साध रखी है। उल्टा कोरोना के बहाने सरकार दुकानदारों पर प्रतिबंध लगा रही है, लेकिन यूनियन सरकार के इन प्रतिबंधों का विरोध करेगी। पंजाब में भी दुकानदारों का दुकानें खोलने के लिए साथ दिया जाएगा।
बीबी गुलाब कौर नगर के मंच से किसान नेताओं ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस पर सरकार को उचित व्यवस्था करनी चाहिए। दुकानदारों पर दुकानें बंद करने के आदेश वापस लेने चाहिए। उन्होंने दूसरी कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली मोर्चा में किसानों की संख्या रबी के मौसम में कम रही। लेकिन अब 10 और 12 को पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर के रास्ते हजारों किसान टीकरी बॉर्डर के लिए चलेंगे। इन काफलों में पंजाब के हजारों किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी शामिल होंगे।
किसान औरत विंग की जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमजीत कौर ने कहा कि एक साल पहले आए कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। सरकारी शिक्षा का निजीकरण शुरू किया गया। देश के सार्वजनिक संस्थानों की बिक्री शुरू कर दी गई।
मास्टर गुरचरण सिंह खोखर ब्लॉक नेता लहरागागा ने कहा कि मोदी सरकार के नव-उदारवादी मॉडल ने साबित कर दिया है कि सभी तरह के सरकारी संसाधनों को बेचना है। स्वास्थ्य सुविधाओं को अब एक वर्ष से अधिक समय के लिए उपेक्षित किया गया है। ऐसी संकट की स्थिति में मानवता को धक्का दिया जा रहा है। इससे देश को नए प्रकार के झटके लगेंगे। इस अवसर पर हरितेंद्र दीवाना के निर्देशन में चेतना कला केंद्र बरनाला की नाटक मंडली ने गुरशरण भाजी के जंगी राम दी हवेली नाटक का प्रदर्शन किया। सतपाल सिंह फाजिल्का और संदीप सिंह घरचोन ने भी सभा को संबोधित किया।