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लोहड़ी की आग में किसान जलाएंगे तीन कानूनों की प्रतियां

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टीकरी बॉर्डर के पास सड़क किनारे पक्का निर्माण करते किसान। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
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मौसम प्रतिकूल होने के बाद भी मंगलवार को किसान 41वें दिन भी आंदोलन में डटे रहे। लंबी लड़ाई के लिए तैयार किसानों ने बारिश से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। टीकरी बॉर्डर के निकट सड़क किनारे कुछ किसानों ने ईंटों और डस्ट-सीमेंट के मसाले से पक्का निर्माण करना शुरू कर लंबी लड़ाई का संकेत दे दिया है। किसानोें द्वारा 6 जनवरी की बजाय ट्रैक्टर मार्च 7 जनवरी को निकालने की तैयारी शुरू कर दी गई है। किसानों ने कहा कि 13 जनवरी को वे लोहड़ी की आग में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे।
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राष्ट्रीय किसान मंजदूर संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले हरियाणा के कई संगठनों के नेताओं ने छोटूराम धर्मशाला बहादुरगढ़ में बैठक कर हरियाणा के अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जुड़ने के लिए चर्चा की। इलाके में तीनों हाईवे के चारों टोल प्लाजा पर संबंधित कंपनियां टोल नहीं वसूल पाईं। टीकरी बॉर्डर और ढांसा बॉर्डर पर ग्यारह-ग्यारह किसान अनशन पर रहे। उत्तर प्रदेश से भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ढांसा बॉर्डर का दौरा किया। किसानों ने 9 जनवरी को चौ. छोटूराम की जयंती मनाने का फैसला लिया है। राजिंदर सिंह ने बताया कि 7 जनवरी को किसान टीकरी बॉर्डर से शाहजहांपुर तक ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।
सोमवार रात और मंगलवार को इलाके में बारिश होती रही। सोमवार रात और मंगलवार सुबह तेज बारिश हुई। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किसानों की ट्रालियों में बने टेंट अस्त-व्यस्त हो गए। इसके बावजूद किसान अपने आंदोलन में डटे रहे। मंगलवार को बारिश से बचाव के इंतजाम करते नजर आए। टीकरी बॉर्डर के निकट तो ईंट-भट्टे से ईंटें और डस्ट-सीमेंट मंगवाकर किसानों ने सड़क किनारे अपना ठिकाना पक्का बनाने का काम शुरू कर दिया है।
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किसान नेता छज्जू सिंह ने कहा कि ऐसा करके किसान यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे लंबे आंदोलन के लिए टिकने को तैयार हैं। सरकार को आखिर झुकना ही पड़ेगा। बॉर्डर पर और पकौड़ा चौक के निकट हर रोज होने वाली किसानों की सभाएं बारिश के कारण प्रभावित रहीं।
ढांसा बॉर्डर पर राकेश टिकैत ने कहा कि 4 जनवरी को हुई बातचीत में उन्होंने और अन्य किसान नेताओं ने केंद्रीय मंत्रियों को साफ कह दिया कि कानून वापसी व एमएसपी मिलने पर ही आंदोलन खत्म हो सकता है। केवल संशोधनों से कुछ नहीं होगा। टीकरी बॉर्डर पर किसान नेता जसबीर सिंह ने कहा कि 13 जनवरी को किसान लोहड़ी की आग में केंद्र सरकार के तीनों कानूनों की प्रतियां जलाएंगे। उन्होंने कहा कि अब सरकार के समक्ष कानून वापसी और हमेशा के लिए एमएसपी देना सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
हरियाणा के किसान संगठनों ने हरियाणा के किसानों की आंदोलन में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए छोटूराम धर्मशाला बहादुरगढ़ में मीटिंग की। इस मीटिंग की अध्यक्षता करनाल से आए भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र आर्य दादूपुर ने की। आर्य ने बताया कि हरियाणा के किसान संगठनों के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों को तीनों कानूनों के नुकसान बताएंगे और उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बैठ आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करेंगे। मंगलवार को पंजाब के मानसा, बठिंडा, लुधियाना व मोगा आदि जिलों से काफी किसान टीकरी बॉर्डर आंदोलन में शामिल होने के लिए इंटरसिटी व किसान एक्सप्रेस रेलगाड़ियों से और सड़क मार्ग से बहादुरगढ़ पहुंचे।

ट्रॉली में लगाए गए अपने तंबू को बारिश से बचाने का इंतजाम करते किसान। संवाद- फोटो : Bahadurgarh

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