साल्हावास। क्षेत्र के गांव खोरड़ा, गोरिया, खानपुर खुर्द, खानपुर कलां, बहु, खेतावास व कोयलपुर गांवों में 13 व 14 सितंबर को हुई अधिक बारिश होने से खरीफ की फसलों और मकानों को नुकसान हुआ था, लेकिन अब प्रशासन ने रिपोर्ट जारी कर केवल एक गांव के 15 घरों व फसल में नुकसान बताया गया है। इस लोगों को मुआवजा मिलने की उम्मीद खत्म हो गई हैं।
नुकसान का अनुमान लगाने और रिपोर्ट जारी करने के बीच में विधानसभा चुनाव भी संपन्न हो गए हैं और नई सरकार का गठन भी किया जा चुका है। किसान उमेश गोरिया, सत्यवान, अनिल भूकर, विक्रम भूकर, इंद्रजीत का कहना है कि लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब फसलों की गिरदावरी होगी और बारिश के कारण खराब हुई फसलों के नुकसान के रूप में मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट देखकर किसानों के रोंगटे खड़े हो गए हैं। प्रशासन की तरऊ से जारी की गई रिपोर्ट में केवल खोरडा गांव के 15 मकानों में नुकसान बताया गया है। साथ ही खोरड़ा गांव की 1500 एकड़ फसल में 75 से 100 प्रतिशत नुकसान दिखाया गया है जबकि रिपोर्ट में अन्य गांवों में कोई नुकसान नहीं दर्शाया गया है। प्रशासन की तरफ से जारी रिपोर्ट को देखकर किसानों भी हैरान रह गए हैं और उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
गोरिया गांव में अभी भी खेतों में पानी खड़ा हुआ है और बारिश के कारण पूर्ण रूप से नष्ट होई फसल अभी भी देखी जा सकती है। ऐसे में अब प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट पत्र पर सवालिया निशान खडे़ किए जा रहे हैं कि इस प्रकार की रिपोर्ट कैसे जारी हो सकती है। देखने लायक बात यह है कि गोरिया गांव के खेतों में खड़ी हुई फसल पूर्ण रूप से नष्ट हो चुकी है और खेतों में अभी भी पानी खड़ा हुआ है। रबी की फसल की बिजाई भी होती संभव नहीं नजर आ रही है।
3020 एकड़ फसल के संदर्भ में रिपोर्ट हुई जारी
फील्ड स्टाफ ने दी रिपोर्ट में खानपुर खुर्द में 50 एकड़, खानपुर कलां में 50 एकड़, बहू में 800 एकड़, गोरिया में 500 एकड़, खेतावास में 70 एकड़ व कोयलपुर में 50 एकड़ में कोई नुकसान नहीं दिखाया गया है और न ही यहां के मकानों में नुकसान दर्शाया गया है जबकि खोरडा गांव के 15 मकानों में नुकसान दिखाया गया है।
वर्जन
गोरिया जैसे गांव के खेतों में अभी भी पानी खड़ा हुआ है। यहां 500 एकड़ में फसल नष्ट हुई है। नुकसान न होने की बात तर्कसंगत नहीं है। प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट व पत्र के बारे में उच्च अधिकारी ही बता सकते हैं।
जयवीर, तहसीलदार मातनहेल