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अगले महीने, छह महीने के लिए राशन लाएंगे और कानून वापसी पर ही जाएंगे : बूटासिंह

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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना सोमवार को छठे महीने में प्रवेश कर गया। पांच महीने पूरे होने के मौके पर यहां कई बड़े किसान नेता पहुंचे और किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि छह महीने पूरे होने के बाद चाहे उन्हें अगले छह महीने के लिए राशन लाना हो, लेकिन तीन कानून वापस होने से पहले आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।
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रविवार को भाकियू राजेवाल के पंजाब राज्य अध्यक्ष बलबीर राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन सभा डकोंडा के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल, भाकियू (शिदिपुर) पंजाब के अध्यक्ष जगजीत सिंह दालेवाल और कुल हिंद किसान सभा पंजाब के सचिव बलकरण सिंह बराड़ ने भी संबोधित किया। ये सभी नेता धरने को पांच महीने पूरे होने के मौके पर यहां पहुंचे थे। मुख्य सभा में पिछले कई दिनों के अपेक्षा किसानों की भीड़ भी अच्छी रही।
बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि हमें मोर्चे पर डटे हुए 5 महीने हो गए। छह महीने होने में एक महीने और रह गया है। हमें दोबारा 6 महीने का राशन एकत्रित करना है। लेकिन कानून वापस करवाकर अपने घर जाएंगे। बलकरण सिंह बराड़ ने कहा कि इस सरकार ने न केवल किसानों के लिए गलत कानून बनाए बल्कि सरकारी कारखानों को भी प्राइवेट कर रही है। पिछले दिनों हैदराबाद में एक स्टील कारखाने को बंद कर दिया है। वहां कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस सरकार ने रेलें तक बेच दीं। अब किसानों पर हमला किया है, हम चुप नहीं रहेंगे। किसानों से गलती तो हुई है कि हमने गलत लोगों की सरकार बना दी, लेकिन अब ऐसी गलती नहीं होगी। इनको अगले चुनाव में पता चल जाएगा।
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किसानों को संबोधित करते हुए बलबीर राजेवाल ने कहा कि बीजेपी सरकार किसानों को बहुत भोले मानकर यह तीन किसान विरोधी कानून ले तो आई लेकिन, अब ये कानून सरकार के गले की फांस बन गए हैं। सरकार ने सोचा था कि किसानों की अलग-अलग जत्थेबंदी अपने हकों के लिए लड़ेंगी लेकिन इस आंदोलन में जत्थेबंदियां इकट्ठे होकर लड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही एक इंटरनेशनल कांफ्रेंस होगी जिससे आंदोलन को फायदा होगा। दुनिया की आंखें खुल जाएंगी।
उन्होंने कहा कि हमारा रेल रोको अभियान सफल हुआ, भारत बंद सफल हुआ है। बीजेपी सरकार की जडे़ं हिली हैं। बीजेपी नेताओं की गांवों में जाने की हिम्मत नहीं हो रही। संसद में किसानों के हक की आवाज नहीं उठाने पर उन्होंने नेताओं की निंदा की। संसद कूच के बारे में उन्होंने कहा कि हम सोचकर फैसला लेंगे कि हमें दिल्ली कूच कब और कैसे करना है। जिन लोगों ने आंदोलन को 26 जनवरी को चोट पहुंचाई थी वे हमको इस कूच के दौरान भी चोट पहुंचा सकते हैं।
राजेवाल ने कहा कि सरकार कोरोना की आड़ में ऑपरेशन क्लीन की सोच रही है। हम गेहूं की फसल का काम निपटाकर दोबारा ज्यादा संख्या में आंदोलन में जुट जाएंगे। सरकार के कथित ऑपरेशन क्लीन को फेल करेंगे, मोर्चे को मजबूत करेंगे और शांतिपूर्वक आंदोलन चलाएंगे। उसके बाद दिल्ली कूच की सोचेंगे।
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