खरीफ सीजन की फसलों की कटाई के बाद क्षेत्र के किसानों के बीच डीएपी खाद की मांग बढ़ती जा रही है। वहीं पिछले सालों में डीएपी की किल्लत के चलते इस वर्ष किसानों के मन में भय बना हुआ है कि कहीं उन्हें अपनी फसलों की बिजाई बिना डीएपी खाद के करनी पड़े। जिसके चलते किसान खाद बीज विक्रेताओं के लगातार चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार को जिले में 200 एमटी डीएपी खाद मिलने की सूचना मिली थी जो की कुछ ही दुकानों पर पहुंच पाया था। खाद्य सूचना लगते ही किसानों ने साथ के साथ खाद को उठा लिया।
क्षेत्र में सरसों की बिजाई का यह सबसे उत्तम समय है लेकिन किसानों को खाद न मिलने के कारण सरसों की बिजाई प्रभावित हो रही है। रेतीली जमीन के किसान अपने खेतों की बार-बार सिंचाई कर रहे हैं ताकि उनकी सरसों की बिजाई अच्छे से हो सके।
जिले में है डीएपी खाद का 600 एमटी स्टॉक
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में 12 हजार डीएपी के बैग स्टॉक में रखे हुए है जबकि रबी के सीजन में 45 हजार बैग डीएपी खाद जिले को मिल चुका है। वहीं जिलेभर में एक लाख एकड़ में सरसों व करीब ढाई लाख एकड़ में गेहूं की फसल की बिजाई की जाती है। दस दिन के बाद क्षेत्र में गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। यही स्थिति रही तो किसानों के बीच डीएपी खाद की मांग और बढ़ सकती है।
खाद के साथ जबरन अन्य वस्तुएं देने पर होगी कार्रवाई
कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी इंद्र सिंह ने खाद विक्रेता को पत्र जारी कर सूचना दे दी गई है अगर कोई दुकानदार खाद के साथ किसान को अन्य कोई वस्तु जबरन देते मिला तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। वहीं विभाग ने इस सभी दुकानदारों को खाद की स्थिति के बारे में बोर्ड लिखकर दुकान के बाहर चस्पाने के लिए कहा है।
कई दिनों से खाद के लिए दुकानदारों के चक्कर लगा रहा हूं लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। किसी भी दुकान के बाहर दुकान में खाद की स्थिति की कोई जानकारी नहीं लगाई गई है। स्थिति में किसान भ्रमित हो रहे हैं।
-कुलदीप सिंह किसान, गांव रईया।
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मेरी रेतीली जमीन है जिसमें मैं समय से सरसों की बिजाई कर सकता हूं। लेकिन डीएपी खाद न मिलने के कारण मुझे सरसों की बिजाई करने में समस्या आ रही है। पिछले वर्ष भी डीएपी खाद की किल्लत के चलते अच्छी पैदावार नहीं हो पाई थी।
-सुनील किसान, गांव रणखंडा।
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बाजरे की फसल के बाद सरसों की फसल की बिजाई करनी थी। लेकिन खाद न मिलने के कारण सरसों की बिजाई का उपयुक्त समय निकलता जा रहा है। शहर में खाद खरीदने के लिए आते हैं लेकिन दुकानदार मना कर देते हैं। किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाना चाहिए।
-कैलाश किसान, गांव रईया।
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मैं करीब 20 एकड़ की खेती करता हूं। जिसमें अलग-अलग तरह की फसलों की बिजाई करता हूं। सरसों की फसल की बिजाई के लिए डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। शहर व गांव में कई दुकानों पर डीएपी खाद के बारे में पूछा लेकिन सभी दुकानदारों ने मना कर दिया।
-माहिल किसान, गांव डावला।
- करीबन 20 दिन पहले मुझे डीएपी खाद मिला था जोकि 3 से 4 दिन के अंदर किसानों को बेच दिया था। हर रोज 8 से 10 किसान डीएपी खाद के बारे में पूछने के लिए दुकान पर आते हैं।
-प्रवीण दुकानदार।
- 1 महीने पहले बीज बिक्री केंद्र पर डीएपी खाद आया था जोकि अगले दिन किसानों को सूचना मिलते ही किसानों ने खरीद लिया। किसानों के बीच खाद की काफी मांग चल रही है।
बाल कृष्ण शर्मा, उप प्रबंधक, हरियाणा भूमि सुधार विकास निगम।
जिले खाद की डिमांड मुख्यालय को भेज दी गई है। किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद मुहैया कराया जाएगा।
-डॉ. इंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर।