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किसानों ने मनाया सरहिंद फतेह दिवस

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बहादुरगढ़। बुधवार को सरहिंद फतेह के ऐतिहासिक दिन पकौड़ा चौक के पास हुई भाकियू (एकता) उगराहां की सभा का उद्घाटन माधव दास से बाबा सीमा सिंह बहादुर के नेतृत्व में कविश्री जत्थों ने किया। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने चप्पड़चिड़ी से मुगल शासकों के खिलाफ युद्ध शुरू किया और जीत हासिल की। आज भी लड़ाई लड़ रहे हैं। समान अत्याचारी शासन। मुट्ठी भर लोग कब्जा कर रहे थे। आज भी स्थिति यही है कि किसानों की काफी भूमि चली गई है। अमीरों के पास अभी भी हजारों एकड़ भूमि है। लोगों की शक्ति के बल पर, भूमि के इस पुनर्वितरण को समाप्त करना होगा और पुलिस स्टेशनों, अदालतों व न्यायाधिकरणों में मेहनती लोगों की लूट को रोकना होगा। लोगों के अनुकूल राज्य स्थापित करना होगा।
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युवा भारत सभा के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी गुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार भारत के किसानों को बर्बाद कर रही है।
उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी नीतियों के लागू होने से पहले कृषि रोजगार का एक प्रमुख स्रोत था। किसान विरोधी आर्थिक सुधारों की आड़ में इस स्रोत तो साम्राज्यवादी कंपनियां अपने नियंत्रण में ले रही हैं। कंपनियों और बैंकों की लूट के कारण, किसान और श्रमिक कर्ज में डूब गए हैं और आत्महत्या के कगार पर हैं।
उन्होंने कहा कि देश के कृषि संकट को हल करने के लिए, भारत को विश्व व्यापार संगठन की नीतियों को छोड़ने और कंपनियों के अंधे मुनाफे पर वापस कटौती करने की आवश्यकता है। पीएसयू (शहीद रंधावा) के नेताओं अमितोज कौर और जगसीर सलेमगढ़ ने कहा हम कृषि कानूनों के खिलाफ हैं। यह धर्म युद्ध नहीं है। ये कानून लोगों के जीवन को दुखी कर देंगे। रूप सिंह झज्जर (हरियाणा) ने कहा कि भाजपा की सरकार मेहनतकश जनता को लूट रही है। सरकार की नीति और नीयत में अंतर है। कोरोना का कोई प्रकोप नहीं था, लेकिन जब किसानों, मजदूरों को अपने काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ा तो कोरोना वायरस तेजी से फैलता है। इसे रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
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भाकियू (एकता) उगराहां की बठिंडा जिला उपाध्यक्ष परमजीत कौर कोटरा ने कहा कि एक समय था जब बैंक किसानों के घरों की तलाशी लेते थे और कई किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेजते थे। लेकिन आज लोग संगठित हुए हैं तो किसी भी किसान को जेल नहीं भेजा सकता। संगठन ने कुर्की नीलामी पर पूर्ण प्रतिबंध लगवा दिया है। शमशेर सिंह ने कहा कि किसानों और मजदूरों के कल्याण के लिए कोई कानून नहीं बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बहुमूल्य जीवन जा रहे हैं। बलविंदर सिंह घनौर जट्टन ने कहा कि हम अपनी आजीविका के लिए लड़ रहे हैं। राजविंदर सिंह राजू ने मंच संचालन किया।
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