ढांसा बॉर्डर पर किसान आंदोलन में पहुंची महिलाएं।
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बादली। ढांसा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में भाजपा-जजपा नेताओं का बहिष्कार करने का फैसला लिया। यह फैसला जिसका सभी किसानों ने हाथ खड़ाकर समर्थन किया है। गुलिया खाप के प्रधान विनोद बादली ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा ने अपने कुछ नेताओं को किसानों के बीच जाने की जिम्मेदारी लगाई है, ताकि किसानों को आंदोलन में जाने से रोका जा सके। विनोद ने बताया कि गांवों में किसी भी पार्टी के नेता ने किसानों को रोकने का प्रयास किया तो सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ चेतावनी बोर्ड भी गांवों में लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार किसजान आंदोलन को तोड़ना चाहती है। एक षड्यंत्र के तहत गांवों में किसानों को बरगलाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को आंदोलन में जाने से रोका जा रहा है जबकि कुछ लोगों को सत्ता का दुरुपयोग करते हुए डराया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में कोई भी नेता किसानों के बीच जाकर आंदोलन को फेल करने का प्रयास करते हुए मिला तो पार्टी के साथ साथ नेता का बहिष्कार भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर सरकार से तीनों कानूनों को रद्द करवाने की लड़ाई की जा रही है जबकि दूसरी ओर किसानों को अपनी एकजुटता के लिए सरकार से जंग लड़नी पड़ रही है। सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए किसानों की एकजुटता को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। अब एक बार फिर जातिवाद का जहर फैलाने का काम शुरू हो गया है जबकि आंदोलन किसी एक जाति विशेष का नहीं है बल्कि आंदोलन सर्वसमाज का रूप ले चुका है।
इस मौके महम के पूर्व विधायक बाली पहलवान ने भी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि एकजुटता को किसी भी रूप में खंडित नहीं होने दिया जाएगा। धरने पर एडवाकेट सतबीर गुलिया, हेमचंद्र सुरहेड़ा, सतबीर खेड़का, श्रीकृष्ण तंवर ने भी संबोधित किया। जबकि वीरेंद्र डागर अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश, जय प्रकाश बेनीवाल, वेद ठेकेदार, कपूर सिंह कुकड़ोला, मुकेश मुंडाखेड़ा और मुकेश दुबलधन सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।