फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाजपा की ट्रैक्टर यात्रा को दिखाए काले झंडे, सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

विज्ञापन
पुलिस की मौजूदगी में भाजपा की रैली को काले झंडे दिखाते किसान संगठनों से जुड़े लोग। - फोटो : Jhjhar
विज्ञापन
बेरी/झज्जर। कृषि कानूूनों को लेकर जहां सत्ता पक्ष की तरफ से ट्रैक्टर रैली निकालते हुए समर्थन किया गया। वहीं कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने डीघल चौक पर काले झंडे दिखाकर विरोध जताया। काले झंडे दिखा रहे किसानों ने भाजपा नेताओं के ट्रैक्टर का घेराव करने का भी प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने लोगों को एक तरफ कर दिया और ट्रैक्टर चला रहे सांसद डॉ. अरविंद शर्मा तेजी से वहां से ट्रैक्टर को निकाल कर ले गए। दोनों तरफ से नारेबाजी की जा रही थी। एक तरफ से रैली में शामिल किसान व लोग कानूनों के समर्थन में नारे लगा थे। वहीं काले झंडे दिखा रहे किसान संगठनों व इनेलो से जुड़े लोग कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
विज्ञापन

कृषि कानूनों के समर्थन में शनिवार को गांव डीघल बाईपास से शुरू हुई भाजपा की ट्रैक्टर यात्रा को गांव में ही विरोध का सामना करना पड़ा। डीघल गांव के चौक पर बैठे किसानों ने ट्रैक्टर यात्रा के वहां पहुंचते ही विरोध स्वरूप काले झंडे दिखाने शुरू कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इन कानूनों के खिलाफ आखिरी तक लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया। यात्रा को काले झंडे दिखाने का नेतृत्व किसान सभा जिला अध्यक्ष प्रीत सिंह, इनेलो नेता ओम पहलवान, किसान सभा जिला संयोजक नेता सूबेदार सत्यनारायण बहराणा, जिला पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश बैनीवाल ने किया। किसानों के विरोध के बीच यह ट्रैक्टर यात्रा अपने सांपला स्थित गंतव्य की ओर प्रस्थान कर गई।
चौक पर पहुंचने से पहले ही वापस चले गए ओपी धनखड़
इस ट्रैक्टर यात्रा को अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ शुरू कराने के लिए पहुंचे थे। जबकि यात्रा में मुख्य रूप से भाजपा सांसद डॉ. अरविंद शर्मा और पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, जिलाध्यक्ष विक्रम कादयान, पूर्व जिलाध्यक्ष बिजेंद्र दलाल, डॉ. राकेश, सुनीता चौहान सहित काफी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल रहे। ट्रैक्टर यात्रा के शुभारंभ से पूर्व डीघल के बाईपास पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं व किसानों को संबोधित किया। यहां उन्होंने कांग्रेस पर झूठ और भ्रम की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल और केवल अपने राजनैतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए आमजन व खासकर किसानों में झूठ और भ्रम का माहौल पैदा करना चाहती है। उन्होंने इस दौरान एक बस की छत पर अन्य नेताओं के साथ सवार होकर डीजे पर बजाए गए एक गाने कांग्रेस की झूठ नहीं बिकने देंगे पर मोनो एक्टिंग भी की। बाद में मीडिया के रूबरू हुए ओमप्रकाश धनखड़ ने कृषि विधेयकों पर भाजपा की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि हरियाणा में उनकी सरकार के चार साल बचे है। इन चार सालों में भाजपा सरकार एमएसपी पर किसान का एक-एक दाना खरीदेगी। उन्हें आगामी समय में कांग्रेस का कोई भविष्य नजर नहीं आता। कांग्रेसी केवल झूठी हवा बनाने पर तुली है। यात्रा को शुरू करने के लिए कुछ देर ट्रैक्टर पर बैठकर चले ओमप्रकाश धनखड़ रैली के चौक पर पहुंचने से पहले ही वापस चले गए थे।
विज्ञापन

सांसद ने विपक्ष पर साधा निशाना
भाजपा सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने भी यात्रा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसानों की चिंता नहीं है। विपक्ष के हाथ कोई मुद्दा नहीं लगा तो कृषि कानूनों पर जनता को बहकाना शुरू कर दिया।
किसान नेताओं ने बताया काला कानून
किसान सभा जिला अध्यक्ष प्रीत सिंह ने कहा कि किसानों व संगठनों के द्वारा कानूनों के समर्थन में निकाली जा रही ट्रैक्टर यात्रा को काले झंडे दिखाकर रोष प्रकट किया। इन कानूनों का बीजेपी के संगठनों को छोड़ कर कोई समर्थन नहीं कर रहा। भाजपा प्रदेश के किसानों को गुमराह करने के लिए रैली निकाल रही है व किसानों के समर्थन को दिखाने की कोशिश कर रही है। जबकि देश व प्रदेश में किसानों ने 25 सितंबर को लाखों की संख्या में सड़कों पर उतर भारत बंद करके यह दिखा दिया था कि वे इन कानूनों के समर्थन में नही हैं। भाजपा सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने की मंशा से इसे विपक्ष द्वारा प्रायोजित बता रही है, जबकि यह गलत है। भाजपा सांसद बार बार चौधरी छोटू राम का नाम लेते है पर उनके द्वारा संघर्ष की बदौलत खड़ी की गई मंडी व्यवस्था व कानूनों को ही खत्म कर किसानों को उजाड़ने का काम कर रहे है। केंद्र सरकार ने कृषि पैदावार को बेचने के लिए जो कानून बनाया है उस से किसानों को मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। केंद्र सरकार सफेद झूठ बोल रही हैं कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता रहेगा। जब मंडी ही नहीं रहेगी तब न्यूनतम समर्थन मूल्य कहां रहेगा। आवश्यक वस्तु कानून में किये गए बदलाव से काला बाजारी को कानूनी रूप दे दिया। सरकार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से किसानों की जमीनों को हड़पवाने की कोशिश की जा रही है। इन कानूनों से किसानों के पास अपनी आवाज उठाने का हक भी खत्म किया हो गया है व न्यायालय में जाने के रास्ते भी इससे बंद होंगे। किसान पदाधिकारियों ने कहा कि इन काले कानूनों के खिलाफ संघर्ष किसी व्यक्ति, किसी पार्टी की नहीं है। ये किसान व खेती को बचाने का संघर्ष है। देश के 250 से ज्यादा किसान संगठनों के सांझा मंच किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर 14 अक्तूबर को प्रदेश भर में न्यूनतम समर्थन मूल्य दिवस मनाया जाएगा व 26-27 नवंबर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें