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किसान नेता बोले- कोरोना से भी बुरे हैं कृषि कानून

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बहादुरगढ़। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ टीकरी बॉर्डर पड़ाव में आंदोलकारी किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की और नयागांव चौक के निकट भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की सभाएं हुईं। हिसार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आगमन का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस बल प्रयोग की किसान नेताओं ने निंदा की। वक्ताओं ने भी कहा कि नए कृषि कानून किसानों के लिए कोरोना से भी अधिक बुरे हैं।
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गदरी बीबी गुलाब कौर नगर की स्टेज से उत्तराखंड के प्रवीण काशी ने कहा कि सरकार कोरोना का डर का फैलाव कर इन कानूनों को लागू करना चाहती है, लेकिन किसान मोर्चा फिर बड़े स्तर पर बढ़ने लगा है। उन्होंने भगत सिंह और करतार सिंह सराभा के जीवन के उदाहरण देते हुए पंडाल में जोश भर दिया। उत्तराखंड से ही आए बल्ली सिंह ने ..दुनिया को सुंदर बनाने में हिस्सा पावांगी, न रोक सुंदर मुझे मैं धरने में जावांगी.. गीत सुनाकर किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान मजदूरों के प्रति सरकार की नीति और नीयत साफ नहीं है।
करमजीत कौर कड़वा ने कहा कि ये कानून कोरोना से भी बुरे हैं। सभी मेहनती लोगों का बड़े स्तर पर नुकसान करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि हमारे अच्छे दिन कहां गए। जिला पटियाला परमिंदर सिंह ने कहा कि इस संघर्ष के दौरान लगभग 400 किसान, मजदूर शहादत डाल चुके हैं। लोगों को वोटों वाला रास्ता छोड़ कर राजनीतिक लोगों से दूर रह कर किसानों के संघर्ष में आना चाहिए।
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सरबजीत सिंह भरथला ने कहा कि जिस समय हम पंजाब से चले था तब कुछ शरारती तत्वों ने आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की। सरकार ने भी आंदोलन को तोड़ने की कोई कोशिश बाकी नहीं छोड़ी, परंतु आंदोलन दिनोंदिन आगे बढ़ रहा है। हरियाणा के दलजीत सिंह दलाल और महंगा सिंह ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से संघर्ष की शुरुआत हुई और फिर सारे देश मेंआंदोलन उठ गया। बहादर सिंह भुटाल ने भी किसानों के समक्ष अपने विचार रखे।
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