संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। औद्योगिक नगरी बहादुरगढ़ में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के लगातार बढ़ते दामों ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है। उद्यमियों के अनुसार पीएनजी महंगी होने से फैक्टरियों की उत्पादन लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसका असर नए ऑर्डर लेने से लेकर बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने तक दिखाई दे रहा है।
बहादुरगढ़ में 15 से 20 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं, हालांकि इनमें लगभग 350 बड़े उद्योगों के पास ही पीएनजी कनेक्शन हैं। इन फैक्टरियों में प्रतिदिन एक लाख 10 से 15 हजार स्टैंडर्ड क्यूब मीटर (एससीएम) पीएनजी की खपत होती है। उद्यमियों के मुताबिक फरवरी में पीएनजी का रेट करीब 55 रुपये प्रति एससीएम था, जो अब बढ़कर 76.50 रुपये प्रति एससीएम से भी अधिक हो गया है। यानी कुछ ही महीनों में गैस की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है।
पीएनजी की बढ़ती कीमतों को लेकर बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (बीसीसीआई) की ओर से पिछले दिनों मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को पत्र भी भेजा गया था। चैंबर ने उद्योगों को उचित दर पर पीएनजी उपलब्ध करवाने और बढ़ी हुई कीमतों को कम करने की मांग की है।
उधर, हरियाणा सिटी गैस सर्विस के अधिकारी पंकज चौहान का कहना है कि बहादुरगढ़ में पीएनजी के रेट दिल्ली-एनसीआर के कई क्षेत्रों की तुलना में कम हैं। उन्होंने बताया कि पीछे से महंगी गैस मिलने के कारण पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
इंसेट
फुटवियर उद्योग पर दोहरी मार
बहादुरगढ़ देश के प्रमुख फुटवियर उत्पादन केंद्रों में शामिल है। यहां देश का सबसे बड़ा नॉन-लेदर फुटवियर पार्क भी है। उद्यमियों के अनुसार यहां रोजाना करीब एक लाख जोड़ी फुटवियर बनाने की क्षमता है लेकिन खाड़ी देशों में युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और बाजार में कमजोर मांग के बीच उत्पादन पहले के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत तक रह गया है। ऐसे में पीएनजी की बढ़ती कीमतों ने उद्योगों की परेशानी और बढ़ा दी है। उद्यमियों का कहना है कि यदि पीएनजी की कीमतों में राहत नहीं मिली तो उत्पादन लागत और बढ़ सकती है। इसका असर फुटवियर, सिंथेटिक लेदर, रेक्सीन और अन्य गैस आधारित औद्योगिक इकाइयों की प्रतिस्पर्धा पर पड़ने की आशंका है। उद्योग जगत ने सरकार से पीएनजी के दाम कम करने के साथ-साथ वैट रिफंड की व्यवस्था करने की भी मांग की है
वर्जन
पीएनजी के रेट बढ़ने का फैक्टरियों पर सीधा असर पड़ा है। उत्पादन लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। बहादुरगढ़ का उद्योग पहले ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और कमजोर मांग की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में महंगी पीएनजी उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही है। सरकार को उद्योगों के लिए उचित दर पर गैस उपलब्ध करवाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।-नरेंद्र छिकारा, वरिष्ठ उपप्रधान, बीसीसीआई
वर्जन
पहले फैक्टरी का पीएनजी बिल 21 से 22 लाख रुपये महीने आता था, जो अब बढ़कर 34 से 35 लाख रुपये तक पहुंच गया है। फैक्टरी में प्रतिदिन करीब 7 से 8 हजार जोड़ी का उत्पादन होता है। पहले एक जोड़ी पर करीब 15 रुपये का खर्च आता था, जो अब बढ़कर करीब 19 रुपये हो गया है। यानी प्रति जोड़ी करीब चार रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। लागत बढ़ने के कारण ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं।-विनोद जैन, जूता सोल निर्माता :
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फैक्टरी में सिंथेटिक लेदर तैयार किया जाता है। पीएनजी के रेट बढ़ने से उत्पादन लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। गैस उद्योग के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए इसके रेट में होने वाली हर बढ़ोतरी का सीधा असर तैयार माल की लागत पर पड़ता है।-मुकेश, मालिक, एचडी पोलीकोट
वर्जन
पहले फैक्टरी में 1500 से 1600 एससीएम पीएनजी की खपत होती थी और बिल करीब एक लाख रुपये आता था। अब यही बिल बढ़कर सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गया है। इससे उत्पादन लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। पीएनजी के बिल में वैट का रिफंड भी नहीं मिलता जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।-वेद, मालिक, समर्थ रेक्सीन, गणपति धाम, बहदुरगढ़।