जरूरी वस्तुएं ले जाने वाले वाहनों को इस शुल्क से छूट देने की व्यवस्था है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आने वाले दूसरे राज्यों के व्यावसायिक वाहनों से 31 अक्तूबर की आधी रात के बाद यानी 1 नवंबर की शुरुआत से ही पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लेने के आदेश दिए थे। लेकिन टीकरी बार्डर पर यह अभी शुरू नहीं हो सकी।
एमसीडी करती है टोल टैक्स की वसूली
इस बार्डर पर फिलहाल दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से टोल टैक्स की वसूली की जाती है। ग्रीन टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी भी निगम के इसी अमले को दी जा रही है। निगम ने टीकरी बार्डर पर टोल टैक्स वसूली में लगे कर्मचारी ओंकार व महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें अब तक ग्रीन टैक्स वसूली के लिए कोई आदेश नहीं आए हैं। उन्हें इसके लिए रसीद व अतिरिक्त मैन पावर आदि किसी तरह के संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए मंगलवार को भी बहादुरगढ़ की तरफ से आने वाले तमाम व्यावसायिक वाहन सिर्फ एमसीडी का टोल टैक्स देकर निर्बाध रूप से दिल्ली में प्रवेश करते रहे।
जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को नहीं देना होगा टैक्स
दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की योजना के मुताबिक, दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूल करने का फैसला लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह शुल्क 1 नवंबर से लेने के आदेश दिए थे। दिल्ली रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को इस शुल्क से छूट रहेगी। दूसरे राज्यों के वाहनों को प्रति फेरा 700 से 1300 रुपये तक पर्यावरण शुल्क देना होगा। यात्री वाहनों, रोगी वाहनों, सब्जियों, फलों, दूध, अनाज व डीजल-पेट्रोल आदि जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क नहीं देना होगा।
बाईपास रूटों का कर रहे इस्तेमाल
शुल्क से बचने के लिए व्यावसायिक वाहनों के चालकों को दिल्ली से बाहर बने बाईपास रूटों का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई है। इसलिए बुधवार को भी बहादुरगढ़ की ओर से दूसरे राज्यों को जाने वाले सैकड़ों व्यावसायिक वाहन पैसे बचाने के लिए दिल्ली के रास्ते जाने के बजाय दूसरे रूटों से निकल गए। ट्रांस्पोर्टर कर्मबीर सिंह ने कहा कि अब दिल्ली में जाने से बचना ही ठीक है। यह साफ नहीं हो पाया है कि दवाइयों, सभी तरह के गैस सिलेंडर व समाचार पत्र ढोने वाले वाहनों से यह शुल्क लिया जाएगा या नहीं।
क्या कहना है ट्रांसपोर्टरों का
दिल्ली सरकार ने दो एक्सल वाले व्यावसायिक वाहनों से 700 रुपये, तीन एक्सल से 1000 और चार व अधिक एक्सल वाले वाहनों से 1500 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूलने के निर्देश दिए हैं। ट्रकों के मालिक इस शुल्क लगाने से खासे नाराज हैं। दि पब्लिक कैरियर ट्रक यूनियन बहादुरगढ़ के प्रधान मनोज कुमार का कहना है किअब उनका धंधा चौपट हो जाएगा। पहले से ही टोल टैक्स देना पड़ता है। अब नया शुल्क तो उससे भी कई गुना ज्यादा है। इस मार को ट्रांसपोर्टर सहन नहीं कर पाएंगे।