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बिजली कर्मचारी बोले, अच्छे दिन महंगाई के कर्मचारियों के नहीं

Sat, 25 Jun 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
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protest - फोटो : Bureau
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प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और सरकारी विभागों के निजीकरण के विरोध में लगातार धरने प्रदर्शन हो रहे हैं। इसको लेकर डीसी व एसडीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार मुखिया के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं। अगर इसी प्रकार से समस्या उभरती रही तो जल्द ही यह विरोध एक आंदोलन का रूप भी ले सकता है, लेकिन सरकार इसकी ओर बिल्कुल ही उदासीन दिखाई दे रही है।
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 निजीकरण व कर्मचारियों की अन्य मांगों को लेकर अगर इसी प्रकार से जिरह होती रही तो तो फिर इस समस्या के समाधान के लिए कौन आगे आएगा। कर्मचारी वर्ग यूनियन संगठनों का कहना है कि उन्हें भाजपा सरकार आने के बाद अच्छे दिनों की उम्मीद सी जागती दिखाई दी थी, लेकिन सरकार द्वारा इस प्रकार की कर्मचारी विरोधी नीति के कारण जो दिन पहले थे वो भी नहीं बचते दिखाई दे रहे। बिजली विभाग के 23 सब डिवीजनों के निजीकरण की पॉलिसी पर भी कर्मचारी वर्ग धरने प्रदर्शनों व ज्ञापनों के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुका है, लेकिन सरकार के मंसूबे कुछ और ही दिखाई दे रहे हैं। आमजन के मन में भी एक सवाल बार-बार उठता दिखाई दे रहा है कि इस प्रकार की कार्य प्रणाली के माध्यम में प्रदेश सरकार किस प्रकार से प्रदेश का विकास करने की सोच रही है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि प्रदेश का विकास लोगों के सड़कों पर आने से नहीं बल्कि एक अच्छी कार्यप्रणाली की नीति के तहत होगा। कहां किस विषय को लेकर हो रहे हैं, धरना प्रदर्शन व ज्ञापन सौंपने के कार्य।

नंबर 1  
प्रदेश सरकार द्वारा बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले दो महीने से बिजली कर्मचारी आंदोलन में हैं। जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए गर्मी के मौसम में बिजली की सुचारु रूप से सप्लाई करते हुए कर्मचारी धरने-प्रदर्शन, भूख हड़ताल करके निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। सरकार की निजीकरण-आउट सोर्सिंग नीतियों का विरोध व अपनी न्यायोचित मांगों के लिए बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश सचिव राजेंद्र जुलाना और जिला प्रधान जयपाल गुढ़ा ने आज सिंचाई विभाग, बिजली निगम, ट्रेजरी, आईटीआई, रेवेन्यू, स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के साथ गेट मीटिंग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बिजली निगम के कर्मचारी 29-30 जून को पूर्ण हड़ताल करेंगे।
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नंबर 2  
इसी निजीकरण के विरोध में गुड़गांव रोड स्थित स्थानीय जलघर में भी हरियाणा कर्मचारी महासंघ की ओर से पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल यूनियन सदस्यों ने भी बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में की गई। जिसमें निजीकरण के अलावा सरकार की किसान विरोधी नीतियों की भी निंदा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए उत्तम मलिक ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो जल्द ही सरकार बातचीत के माध्यम से इस प्रकार की नीतियों पर लगाम लगाके समस्याओं का समाधान करें। अगर ऐसा नहीं होता तो प्रदेश सरकार आगे आने वाले गंभीर परिणामों को भुगतने को तैयार रहें।

नंबर 3  
आशा वर्करों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय का घेराव किया और इस प्रकार की नीति को लेकर जमकर नारेबाजी भी की। आशा वर्करों का कहना था कि उनकी लंबित पड़ी मांगों की तरफ सरकार व विभागीय अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। काम के हिसाब से उन्हें मेहनताना भी नहीं दिया जा रहा। उनका कहना था कि इस प्रकरण के कई बार दोहराया जा चुका है, लेकिन प्रदेश सरकार के कानों पर इसकी जूं तक नहीं रेंग रही है। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रही राज्य प्रधान प्रवेश मातनहेल ने कहा कि सरकार उनक ी वेतन विसंगतियों को लेकर उनके साथ खेल कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले आशाओं के फिक्स वेतन का ढिंढ़ोरा पीटने वाली सरकार सत्ता में आते ही अपने वादों से मुकर रही है। इस बात को लेकर सामान्य अस्पताल में की गई बैठक के बाद जब वे सीएमओ को ज्ञापन देने के लिए पहुंची तो उनके कार्यालय से बाहर होने की सूचना मिली। जिसस गुस्साई वर्करों ने एक बार तो सीएमओ कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन जल्द  ही सीएमओ के आने से राहत की उम्मीद जागी। इस बारे में प्रवेश ने बताया कि सीएम ने ज्ञापन लेते हुए उन्हें उनकी मांगों के प्रति उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

नंबर  4  
बिलजी के निजीकरण को लेकर रोडवेज कर्मियों ने भी सरकार को चेताते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार बिजली कर्मियों को अकेला समझने की भूल न करें। उन्होंने सरकार की इस निजीकरण की पॉलिसी का विरोध किया। इस बारे में प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह धनखड़ ने प्रदेश सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार इस प्रकार की नीति का प्रयोग करके बिजली कर्मियों को दबाना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने  बताया कि अगर इस तरह निजीकरण की प्रथा ने जन्म लिया तो वे सभी कंपनियां अपने मुनाफे
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के लिए कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करने पर उतारू होंगी।
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