संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। स्कूलों में एक से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश किए जाएंगे। इसका पत्र भी जारी हो चुका है। निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा के अनुपालन में कार्य में बदलाव किया गया है। इसमें परंपरागत शिक्षण लेखन तथा रटने की प्रकृति की अपेक्षा निपुण में अनुभव आधारित शिक्षण पर ध्यान दिया गया है। इस योजना के चलते इस बार गर्मी की छुट्टी में बच्चों को दादा-दादी, नाना-नारी के पैर दबाने है और सोने से पहले उनसे कहानी सुननी है।
इसी प्रकार तरबूज, खरबूजे के बीजों को साफ कर उनकी गिनती कर उनके जोडे़ बनाने होंगे। ऐसे ही कम से कम एक कविता, भगवान की प्रार्थना, भजन, शब्द या अन्य आर्थिक प्रार्थना कंठस्थ करनी है। अवकाश के दौरान साप-सीढ़ी, लूडो या कैरम जैसे घर में खेले जाने वाले खेल अपने भाई-बहन या बड़ों के साथ खेलने हैं। इसमें स्वतंत्र समय सारिणी, स्वछंद शिक्षण, अनुभव आधारित पठन-पाठन में पाठ्य पुस्तकों से अलग कहानी, अखबार, बाजार, समाज, परिवेश के माध्यम से पठन-पाठन करवाया जाएा। यह अनूठा गृह कार्य परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया जाएगा, जिसमें बच्चे नाना-नानी, दादी-दादी एवं बडे़ सदस्य मेंटर की भूमिका निभाएंगे। वह अपने अनुभवों के साथ नई पीढ़ी को सामान्य ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता कौशल, व्यवहार कुशलता प्रदान करेंगे।
यह सभी गतिविधियां जहां विद्यार्थी को पढ़ने-लिखने, गणना जैसे कौशल प्रदान करेगी, वहीं उन्हें आंकलन, अनुमान लगाना, विश्लेषक, एकीकरण एवं प्रस्तुतिकरण सीखाएंगी। विद्यार्थियों के शब्दकोष का भी विस्तार होगी। बच्चे इसके तहत गीत, लोकगीत, पहेलियां, कहानियां, वृतांत, किस्से तथा 20वीं सदी के विचार, रिवाज, परिवार के सदस्यों की पिछली पीढि़यों तथा लोकतंत्र के पर्व की जानकारी प्राप्त करेंगे। परिवार के सदस्यों के साथ जोड़कर बनाई गई यह गतिविधियां उन्हें हर समय मोबाइल, कंप्यूटर, टेलीविजन से दूर रखेंगी तथा परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के साथ लगाव एवं जुड़ाव हा