बिजली किल्लत से परेशान 12 गांवों के ग्रामीणों ने सोमवार को बादली स्थित निगम कार्यालय में जोरदार हंगामा किया। ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर लिखित में चार दिन का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस समयावधि में उनकी मांग नहीं मानी जाती है तो कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया जाएगा।
सोमवार की सुबह बादली से अमित प्रधान, पाहसौर से सतेंद्र संटी प्रधान, लगरपुर से चांद प्रधान, दरियापुर से संदीप प्रधान, देवरखाना से मंगतराम प्रधान और निरंजन, माजरा गांव से सुनील प्रधान, लोहट से राकेश प्रधान, पेलपा से महाबीर प्रधान, निमाना से अनिल प्रधान समेत काफी संख्या में ग्रामीणों के साथ निगम कार्यालय में पहुंचे। ग्रामीणों ने पहले तो निगम कार्यालय को घेराव करने का प्रयास किया, मगर एसडीई खूबचंद के समझाने पर ग्रामीणों ने अपनी मांग को उनके सामने रखा। ग्रामीणों की मांग सुनने के बाद एसडीई ने उन्हें अपने अधिकार से बाहर बताते हुए ऊपरी अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया।
दो घंटे आती है बिजली
अमित प्रधान ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली निगम ने मात्र 12 घंटे का शेड्यूल बनाया है और उसमें भी बार-बार अघोषित कट लगा दिए जाते हैं। दिन में मात्र 2 घंटे बिजली मिलती है जबकि रात के समय भी बिजली कटों से निजात नहीं मिलती। बिजली न आने के कारण बेहद परेशानी हो रही है। कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त संटी पाहसौर ने भी बिजली जर्जर तारों की समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया।
लिखित में दिया अल्टीमेटम
सरपंचों और ग्रामीणों ने 16 घंटे के लिए बिजली सप्लाई किए जाने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि शुक्रवार तक उनकी मांग नहीं मानी गई तो बड़े स्तर पर आंदोलन के साथ-साथ घेराव भी किया जाएगा। इसी मांग को लेकर पंचायतों ने एसडीई को लिखित में अल्टीमेटम भी दिया है। 16 घंटे से कम बिजली शेड्यूल पर समझौता नहीं किया जाएगा।
23 में से 12 पंचायतें पहुंची
निगम कार्यालय के अधीन 23 गांव आते जिनमें से 12 गांवों की पंचायतें सोमवार को कार्यालय पहुंची और बिजली का शेड्यूल बढ़ाए जाने की मांग की। कई अन्य गांवों की पंचायतों को कहना है कि वह भी ग्रामीण के साथ मंगलवार को निगम कार्यालय पहुंचेंगी, क्योंकि सभी गांवों में बिजली किल्लत बनी है और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारी बोले
एसडीई खूबचंद ने बताया कि पंचायतों और ग्रामीणों की समस्या मिली है जिन्हें ऊपरी अधिकारियों के पास भेजा जा रहा है। बिजली शेड्यूल बढ़ाने उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वह तो केवल अधिकारियों के आदेशों की पालना करते हैं।
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