बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर मनोरंजन के विभिन्न साधन किसानों के लिए बहुत मददगार साबित हो रहे हैं। इंटरनेट, टीवी और स्थानीय लोक गायकों के अलावा साहित्य से भी आंदोलनकारी बहुत लाभ उठा रहे हैं। अपने घरों से दूर रह रहे इन किसानों को रुचिकर साहित्य उपलब्ध कराने के लिए बठिंडा के कुछ समाजसेवियों ने लाइब्रेरी की व्यवस्था की है।
टीकरी बॉर्डर से जाखोदा बाईपास तक एनएच-9 पर, पकौड़ा चौक के पास निर्माणाधीन ऑटो मार्केट के मैदान में, सेक्टर-9 के निकट नए बस अड्डा परिसर में और सेक्टर-9 मोड़ से बहादुरगढ़ सिटी मेट्रो स्टेशन तक किसानों का पड़ाव है। ये किसान एंड्रायड फोन के सहारे समय व्यतीत करने के साथ ट्रॉलियों में टीवी भी लगाए हैं।
मोगा जिले के जगजीत सिंह जैसे स्थानीय पंजाबी लोक गायकों को भी श्रोता मिले हैं। काफी आंदोलनकारी किताबें पढ़ने में रुचि लेते हैं। सेक्टर-9 के सामने पेट्रोल पंप परिसर में बठिंडा के कुछ लोग एक लाइब्रेरी चला रहे हैं। इस लाइब्रेरी में पंजाबी की किताबों की अधिकता है, लेकिन सुभाषिणी कपूर की महिलाओं का पुलिस में योगदान, सरोज शर्मा की सर्वशक्तिमान गायत्री मंत्र, अलेक्सानंद पुश्किन का उपन्यास बदला और मेजर सिंह द्वारा संग्रहीत आर्टिकल्स ऑफ फेथ भी साहित्य के इस छोटे से खजाने में मिलता है। विश्वविद्यालय छात्रों के लिए डॉ. वेंकट शर्मा की आलोचनात्मक पुस्तक हिंदी गद्य के आयाम जैसी कई पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं।
लाइब्रेरी से कुछ साहित्य मुफ्त बांटा भी जा रहा है। इन पुस्तकों को वापस नहीं लिया जाता। कई लेखक व प्रकाशक भी किसानों के पड़ाव में किताबें बांटते हैं। भारत में खेती, वीर भगत सिंह और पंचनद प्रदेश पंजाब जैसी कई किताबें सैकड़ों की संख्या में यहां बांटी जा चुकी हैं। लूणा, चिट्टा लहू, ऐहो हमारा जीवणा, जवाहर लाल नेहरू : द ज्वेल्ज ऑफ इंडिया और प्रो. पूर्ण सिंह द्वारा लिखित द टेन मास्टर्स को भी लाइब्रेरी संचालकों ने किसानों को नि:शुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध करवाया है।
एक अंग्रेजी समाचार पत्रिका के ताजा अंक की कई प्रतियां नियमित रूप से पाठकों के लिए लाई जाती हैं। बठिंडा के निवासी कई लोग इस पुस्तकालय में पुुस्तकें उपलब्ध करवा चुके हैं।
नए बस अड्डे के पास अपनी ट्रॉली में अस्थायी निवास में मौजूद बुढलाडा से आए 48 वर्षीय अरुण कुमार ने कहा कि कई बार लोगों से सुनते हैं कि हमारा समय नहीं कटता, लेकिन यहां आंदोलन में खेती का और घर का काम नहीं होने के बावजूद हमारे पास समय ही नहीं है। किसान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के बाद मैं हर रोज दो-तीन घंटे किताबें पढ़ता हूं। फिलहाल मैं रजनीकांत लहरी की ‘अनंत की ओर’ पढ़ रहा हूं। यह मुझे पेट्रोल पंप पर खोली गई लाइब्रेरी से नि:शुल्क मिली है।
बठिंडा के सर्वजीत सिंह ने बताया कि वह हर रोज दो घंटे का समय स्वाध्याय को देते हैं। घर से अपने साथ तीन किताबें लेकर आया था। यह लाइब्रेरी उनकी हाबी में खास मदद कर रही है। मोगा के युवा हर्षदीप सिंह ने लाइब्रेरी से पढ़ने के लिए ‘मेटरनल हेल्थ केस स्टडीज फ्राम इंडिया’ ली। उन्होंने कहा कि यहां लाइब्रेरी में किताबें बेशक बहुत कम संख्या में हैं, लेकिन ऐसी जगह लाइब्रेरी देखकर दिल खुश हो गया। कुछ न कुछ ज्ञान तो मिलेगा ही।
बठिंडा से आए बुजुर्ग गुरमेल सिंह ने लाइब्रेरी से ‘दुनिया तों न्यारे गुरु गोविंद सिंह’ में रुचि दिखाई। आंदोलन शुरू होने के बाद यह लाइब्रेरी 30 नवंबर को शुरू हुई। यहां मौजूद सुखदेव सिंह के मुताबिक अब तक 1108 लोग यहां से सेवा ले चुके हैं।
लाइब्रेरी को संभाल रहे बठिंडा के संदीप सिंह ने बताया कि युवा आंदोलनकारी आधुनिक साहित्य में रुचि ले रहे हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बुजुर्ग धर्म-कर्म की किताबों में रुचि दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि सोनिया सिंह यहां से धार्मिक किताब लेकर जाती हैं और आंदोलनकारी महिलाओं को पढ़कर सुनाती हैं। सभी पाठक पुस्तक पढ़कर खुद ही लौटा जाते हैं।