फोटो 61 : गेहूं बुवाई में लगा किसान। संवाद
बादली। मानसून के दौरान हुए जलभराव वाले रकबे में अब पानी की नमी सूखने के चलते किसान गेहूं की पछेती किस्मों का चयन कर सकते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की पछेती बिजाई का समय चल रहा है और कुछ दिनों से पश्चिमी हवा चलने और दिनभर धूप खिलने से जलभराव वाले खेतों से पानी सूख गया है। अब किसानों को ऐसे क्षेत्र में भी बिजाई शुरू कर देनी चाहिए। क्षेत्र के गांव देवरखाना, बुपनियां और शाहपुर में ऐसा रकबा रहा है जहां जलभराव हुआ था और किसान अब गेहूं की पछेती फसलों की बिजाई कर सकेंगे।
बीते मानसून सीजन में करीब दो हजार एकड़ जमीन में जलभराव हुआ था और अब खेतों का पानी सूख गया है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिमी हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए भी बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत भी फसलों में कम होती है। दरअसल, कई गांवों के खेतों में जलभराव होने से खरीफ की फसलों में काफी नुकसान हो गया था। बाजरा, कपास की फसलें पानी से खराब हो गई थी। इन क्षेत्रों में अब पानी पूरी तरह से सूख चुका है, अब पश्चिमी हवा चलने व दिन में धूप खिलने की वजह से नमी भी कम हो गई है। अब यहां किसान 25 दिसंबर तक गेहूं की पछेती बिजाई कर सकेंगे। विभाग के अधिकारियों की सलाह है कि किसान यहां पछेती किस्मों का ही इस्तेमाल करें।
पश्चिमी हवा से पौधा होता है गहरा हरा
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. सुनील कौशिक ने बताया कि पश्चिमी हवा से पानी जल्दी सूखने लगता है। पश्चिमी हवाएं चलने से फसलों में छोटे-मोटे रोग अपने आप ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से फसली पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलापन के बजाय गहरे हरे रंग का हो जाता है। अभी गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई का समय है।