झज्जर। रोहतक, सोनीपत व झज्जर जिले के बारिश के पानी को दिल्ली में यमुना तक पहुंचाने वाली आउट फाल ड्रेन नंबर आठ लगभग पूरी क्षमता पर बह रही है। इसमें मात्र आठ क्यूसेक पानी का ही स्थान बचा है। आशंका है कि यदि अच्छी बारिश होती है या फिर पीछे से पानी अधिक आता है तो ड्रेन ओवर फ्लो हो सकती है और खेताें में पानी भरने से किसानों के लिए मुश्किल हो सकती है।
ड्रेन की क्षमता 4000 क्यूसेक है और ढांसा बार्डर रेगुलेटर हैड पर 3992 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। अगर ड्रेन ओवर फ्लाे हुई तो इसका पानी किसानों के लिए अभिशाप बन सकता है। सिंचाई विभाग का दावा है कि ड्रेन के दोनों तरफ के किनारों को मिट्टी लगा कर मजबूत कर दिया गया है। जिले में सिंचाई व कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल जिले में करीब 4 हजार एकड़ भूमि में बारिश का पानी भरा है। जिले के 76 गांव ऐसे हैं। जिनमें दस से 100 एकड़ या इससे अधिक भूमि में बारिश का पानी भरा है। पानी की निकासी के लिए सिंचाई विभाग ने करीब 350 पंप सेट लगाए हुए हैं। झज्जर जिले में खेतों में भरे पानी की निकासी के लिए 37 ओपन ड्रेन बनाई गई हैं। जबकि 11 स्थानों पर पाइप लाइन वाली ड्रेन बनाई गई हैं। फिलहाल ड्रेन नंबर आठ में इतना अधिक पानी चल रहा है कि यदि यह ड्रेन कहीं से भी टूट जाए तो इसके पानी को रोक पाना नामुमकिन होगा। ड्रेन की पटरी के संवेदनशील क्षेत्रों पर पर सिंचाई विभाग की तरफ से हर समय नजर रखी जा रही है। यमुना में अगर पानी अधिक होता है और दिल्ली में इसका गेट बंद कर दिया जाता है तो ड्रेन का पानी बैक भी मार सकता है। जिससे ड्रेन के साथ लगते किसानों के खेतों में पानी भर सकता है।
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ड्रेन नंबर आठ आउटफॉल में इस बार क्षमता के करीब पानी चल रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की गश्त निरंतर जारी है। धीरे-धीरे ड्रेन में पानी कुछ कम हो रहा है। बारिश नहीं हुई तो इसका जल स्तर कम हो जाएगा।
- सतीश कुमार जनावा, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, झज्जर।