प्रदेश में बिगड़े हालातों के लिए भाजपा की प्रदेश और केंद्र सरकार जिम्मेदार हैं। अब विपक्ष पर झूठे आरोप लगाकर वे लाख कोशिश कर लें, लेकिन अपनी विफलताओं को छिपा नहीं सकती। सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भूपेंद्र सिंड हुड्डा पर आरोप लगाकर मनोहर लाल सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहती है जो सरकार की भूल है। हिंसा के बाद सांसद दीपेद्र हुड्डा पहली बार झज्जर आए थे।
हुड्डा कई गांवों में लोगों से मिले और रामपुरा में स्वतंत्रता सेनानी शीशराम यादव के निधन पर शोक प्रकट किया। विधायक गीता भुक्कल के आवास पर पत्रकारों से बात चीच में कहा कि भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर प्रदेश के हालात बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। सरकार सोच रही है कि इस प्रकार के आरोपों से जवाबदेही से बच जाएगी, लेकिन यह उसकी भूल है, सरकार इतनी आसानी से बचने वाली नहीं है।
एक न एक दिन पूरी सच्चाई जनता के सामने आएगी। उन्होंने दोहराया कि अगर सरकार इसकी सच्चाई लोगों के सामने लाना चाहती है, तो सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए। हर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई, हो ताकि किसी भी निर्दोष को राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया न जा सके और दोषियों को सजा मिले। तभी लोगों का विश्वास बनेगा। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि जिन परिवारों में जान व संपत्ति का नुकसान हुआ है, उनकी ज्यादा से ज्यादा मदद सरकार तुरंत करे।
सामाजिक तानाबाना बिगाड़ रहे हैं भाजपा नेता
सांसद दीपेंद्र सिंह ने कहा कि एक सुनियोजित तरीके से पिछले एक साल से भाजपा के सांसद और कुछ मंत्रियों के बड़बोले और आपत्तिजनक बोल अनियंत्रित तरीके से चलते रहे हैं। इससे भाजपा ने प्रदेश में जात-पात का जहर फैलाने की कोशिश की। जब एक शांतिपूर्ण चल रहे आंदोलन का रूप बिगड़ा, उस समय तीन दिनों तक प्रदेश में पुलिस प्रशासन नाम की चीज दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में तीन दिन तक प्रशासन और पुलिस किसके इशारे पर लोगों के बीच से गायब रहे, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार राज्य के इन बिगड़े हालातों में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। भाजपा सरकार राजधर्म और अपना कर्तव्य निभाने में विफल है।
प्रो. वीरेद्र पर नहीं करूंगा टिप्पणी
प्रो. वीरेंद्र के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन अग्रिम जमानत की सुनवाई के आदेशों में न्यायपालिका ने