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इस्तीफा देना है तो तारीख तय न करें विधायक : विकास

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पत्रकारों से बातचीत करते किसान नेता विकास सीसर, जोगेंद्र नैन व अन्य। - फोटो : Bahadurgarh
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हरियाणा के किसानों की को ऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य किसान नेता विकास सीसर ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को किसान आंदोलन के सहारे सुर्खियों में रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर उनके दिल में किसानों के लिए कुछ त्याग करने की भावना है तो स्पष्ट रूप से आगे आना चाहिए।
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सोमवार को टीकरी बार्डर आंदोलन क्षेत्र में प्रेस वार्ता के दौरान विकास सीसर ने कहा कि कुछ विधायक विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं। अगर किसी विधायक को इस्तीफा देना है तो 26 जनवरी के बाद की तिथि न दें, क्योंकि 26 को तो सरकार के साथ टकराव हो जाएगा। सरकार किसानों पर मुकदमे और लाठीचार्ज कर रही है। अगर इस्तीफे देने हैं तो आज ही दें। किसान उन्हें छाती से लगाएगा। चाहेे वह भाजपा का हो या फिर जजपा या कांग्रेस का। सीसर ने कहा कि अगर कोई विधायक 26 के बाद इस्तीफा देने की बात कहता है तो इसे केवल राजनीति समझा जाएगा। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी की तैयारी के लिए बहुत बड़ा ट्रैक्टर मार्च भिवानी में निकाला जाएगा। कमेटी ने टीमें गठित कर ली हैं, जो गांव-गांव जाकर लोगों को इन तीनों कानूनों के बारे बताएंगी और इस आंदोलन में सहयोग की अपील करेगी। उन्होंने बताया कि आंदोलन 47वें दिन में प्रवेश कर चुका है, मगर कुछ नेताओं द्वारा अभी भी आंदोलन में बैठे किसानों को नकली बताया जा रहा है। अगर ये किसान नकली हैं तो असली कहां हैं।
किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि 30 के करीब कमेटियां बनाई हैं जो डोर टू डोर जाएगी और प्रचार करेंगी। 13 जनवरी को लोहड़ी की आग में इन तीनों कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। 18 जनवरी को महिला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। चाहे तहसील या फिर जिले लेवल पर इन कार्यक्रमों का मंच संचालन महिला करेंगी। 26 जनवरी को दिल्ली पहुंचने में महिलाओं का विशेष योगदान रहेगा। 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर हर गांव से 5 ट्रैक्टर निकलेंगे। इसमें एक ट्रैक्टर महिलाओं का होगा। उन्होंने बताया कि ये पहला आंदोलन है, जिसमें सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसान बहुत जल्द ही जजपा विधायक जोगीराम सिहाग के पास जाएंगे और इस्तीफा देने की मांग करेंगे। अब ये लड़ाई पंजाब-हरियाणा की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। इसलिए इसमें सभी सहयोग करें। हमारी केवल एक ही मांग है कानून वापस लो। जो 71 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं वो झूठे है, उन्हें वापस लिया जाए।
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