डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की मरीजों से शालीन व्यवहार न करने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। विभाग के महानिदेशक ने सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी किया है। निर्देश दिए कि मरीजों का इलाज अब कनिष्ठ कर्मचारियों से नहीं करवाया जाएगा बल्कि डॉक्टर ही करेंगे।
आगे कहा कि मरीजों की जांच और उपचार केवल योग्य डॉक्टर ही करेंगे। इतना ही नहीं अस्पतालों में सेवा गुणवत्ता और मरीज संतुष्टि की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
सीएम जनसंवाद, सीएम विंडो सहित अन्य माध्यमों से मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल ने स्पष्ट किया है कि कई संस्थानों में मरीजों की जांच और इलाज कनिष्ठ कर्मचारी करते हैं जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है।
आपातकालीन सेवाओं में आने वाले मरीजों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने, बच्चों और वृद्ध मरीजों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए समय-समय पर व्यवहारिक और सेवा गुणवत्ता संबंधी प्रशिक्षण आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ डा. मंजू कादियान ने बताया कि विभाग मरीजों की सेवा के लिए बना है। ऐसे में विभाग के महानिदेशक के निर्देशों को लेकर संबंधित स्टाफ को अवगत करा दिया गया है। निर्देशों की अवहेलना पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।