अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। करीब दो साल पहले बेरी में एक व्यक्ति से 12 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलकांत की अदालत ने वहां के तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क सहित तीन लोगों को दोषी करार दिए जाने के बाद वीरवार को सजा पर फैसला सुना दिया। फैसले के मुताबिक रजिस्ट्री क्लर्क को धारा-7 पीसी एक्ट में तीन साल व पांच हजार रुपये जुर्माना और धारा 13 पीसी एक्ट में चार साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। रजिस्ट्री क्लर्क के अलावा दो दलाल को भी मामले का दोषी पाया गया। आरोपियों में शामिल दो दलाल मनोज व राजीव को तीन साल की सजा सुनाई गई। लेकिन तीन साल की सजा में मौके पर ही जमानत दिए जाने का प्रावधान होने के चलते दोनों दलालों को अदालत ने जमानत पर छोड़ दिया।
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार करीब दो साल पहले गांव दूबलधन के धर्मबीर नामक व्यक्ति ने विजिलेंस को दी शिकायत में बेरी तहसील के तत्कालीन आरसी समुंद्र द्वारा उसके प्लॉट का इंतकाल दर्ज कराए जाने की एवज में 12 हजार रुपये की रिश्वत मांगे जाने की बात कही गई थी। इस मामले में शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने आरोपी को पकड़ने का जाल बिछाया। योजनाबद्ध तरीके से आरसी को दी जाने वाली रिश्वत की रकम हस्ताक्षरयुक्त रुपये शिकायतकर्ता को थमाएं गए। इसके लिए जिला उपायुक्त की तरफ से ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता धर्मबीर ने जैसे ही रकम आरसी समुंद्र को देनी चाही
तो उसे वह रकम गांव बाघपुर के दलाल मनोज को दिए जाने की बात कही गई। बाद में रिश्वत की यह रकम दलाल मनोज को दी गई। रकम लिए जाने के बाद मनोज ने दो हजार रुपये उसमें से स्वयं अपनी जेब में रखते हुए बाकी के दस हजार रुपये एक अन्य दलाल गांव शेरिया के राजीव को दे दिए गए। दलाल राजीव ने भी इन दस हजार रुपये में से अपना मेहनताना एक हजार रुपये अपनी जेब में रखते हुए 9 हजार रुपये आरसी समुंद्र की अलमारी में रख दिए गए। शिकायतकर्ता से इशारा मिलते ही विजिलेंस की टीम ने पहले तो दलाल राजीव व
मनोज को काबू किया और बाद में आरसी समुंद्र की अलमारी से वह 9 हजार रुपये बरामद किए जोकि दलाल राजीव द्वारा रखे गए थे। इस मामले की तह तक जाते हुए तीन रोज पहले तीनों ही आरोपियों को जिला सत्र न्यायाधीश कमलकांत की अदालत ने मामले का दोषी करार दिया था और फैसला वीरवार तक सुरक्षित रख लिया था। वीरवार को इस मामले में जिला सत्र न्यायाधीश कमलकांत ने तीनों को सजा सुना दी।