अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
दुजाना चौकी में मारपीट और छेड़छाड़ मामले में कोर्ट के आदेश के बाद सात पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज होने के कई दिन बाद भी उनकी गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार में रोष है। पीड़ित परिवार के अनुसार पुलिस जांच से अब उनका भरोसा उठ चुका है। मामले की जांच सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
दूसरी ओर एसएसपी बी सतीश बालन ने पुलिस की ओर से शुक्रवार को सफाई दी है।
पीड़ित परिवार ने अमर उजाला को बताया कि उनके साथ ज्यादती हुई है। चौकी में पहले मारपीट की गई और पिटाई के बाद उन पर ही झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। कोर्ट से मामला दर्ज करवाने के बाद भी पुलिस मनमानी करने में जुटी हुई है। अब उनका पुलिस जांच से भी भरोसा उठ चुका है। वे चाहते हैं कि उनके मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराई जाए।
एसएसपी ने दी सफाई
दुजाना चौकी में हुए प्रकरण पर एसएसपी बी सतीश बालन ने शुक्रवार को पुलिस की ओर से सफाई दी। बालन ने बताया कि 27 अक्तूबर को दुजाना चौकी में दो पक्षों के झगड़े में दोनों पक्षों को बुलाया गया था। चौकी में 60-65 वर्षीय दंपति ने बवाल करना शुरू कर दिया और रोकने पर बुजुर्ग ने पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी। इसके बाद पुलिस ने वर्दी फाड़ने वाले आरोपी बुजुर्ग को वहीं हिरासत में ले लिया। इसके बाद आरोपी के साथ आई महिला बच्चों को चौकी में छोड़कर घर चली गई। इसके बाद वे मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाने के लिए अस्पताल में पहुंच गई। परिवार में तीन लोग पुलिस विभाग से ही हैं तो वे आरोपी को बचाने के लिए हर रोज नए आरोप लगा रहे हैं। एसएसपी ने बताया कि जब महिला बच्चों को चौकी में छोड़कर वहां से चली गई तो पुलिसकर्मियों ने बच्चों को खाना भी खिलाया और उन्हें वहां पर सुला दिया। वहीं, इस मामले में तुरंत सरपंच को भी सूचित किया गया था जिसने बच्चों के माता-पिता को बुलाया। जब बच्चों के अभिभावक चौकी में पहुंचे तो उन्हें बच्चे सौंप दिए थे।
पुलिस की नीयत पर उठे सवाल
- क्या साठ-पैंसठ साल के बुजुर्ग दंपति किसी ट्रेेनिंग प्राप्त पुलिस कर्मी की वर्दी फाड़ सकते है?
- पुलिस ने बुजुर्ग दंपति के घर का पता होने के बाद भी बच्चों को चौकी में क्यों सुलाया। बच्चों को तत्काल घर क्यों नहीं पहुंचाया?