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डेरे का सच: सोमबीर के परिवार को मिली सुरक्षा, कोर्ट जाएगा परिवार

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डेरे का सच: सोमबीर के परिवार को मिली सुरक्षा, कोर्ट जाएगा परिवार
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
डेरे में ‘परमार्थ’ और ‘नकद परमार्थ’ के लिए 38 एकड़ जमीन गंवाने वाले बलकरा निवासी सोमबीर के परिजनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने दो गनमैन नियुक्त कर दिए हैं। सोमबीर की मौत के बाद परिजन खुलकर डेरे के खिलाफ सामने आ गए हैं। परिजनों का कहना है कि डेरा मुखी का सच सामने आने के बाद सोमबीर परिवार के लोगों से ही आंखें नहंी मिला पा रहा था। गांव के लोग भी डेरे के खिलाफ बोलने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोगों की भावनाओं से खेलकर राम रहीम ने सबको धोखा दिया है। परिजनों के कहना है कि डेरे से मिली वस्तुओं को सबूत के तौर संभालकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
रोहतक पीजीआई में पोस्टमार्टम होने के बाद शनिवार को सोमबीर के शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बेटे प्रदीप का कहना है कि राम रहीम को भगवान का दर्जा देकर अपना सर्वस्व लुटाने वाले उसके पिता अंदर से टूट गए थे। बलात्कारी साबित होने के बाद पिता छह अगस्त को घर से लापता हो गया था। इसके तीन दिन पहले भी उन्होंने बुआ की बेटी को सारी व्यथा बताई थी। 17 सालों से सिरसा डेरे से जुड़े गांव बलकरा निवासी सोमबीर के परिजनों ने अंधविश्वास की चादर हटने के बाद डेरे से किनारा कर लिया है। रविवार को अमर उजाला प्रतिनिधि से बातचीत में सोमबीर के बेटे प्रदीप ने बताया डेरे में पढ़ने वाली चारों छोटे भाई-बहनों को वापस घर बुला लिया गया है। प्रदीप ने बताया कि उससे छोटे चारों भाई-बहन डेरे में ही पढ़ते थे। वह शादीशुदा है। बकौल प्रदीप, राम रहीम को मेरे पिता भगवान की तरह पूजते थे। राम रहीम के लिए घर-परिवार वालों तक से झगड़ा किया, जरूरत पड़ी तो समाज से भी लड़े। अंत में जान देकर डेरे से मुक्ति मिली। जिस दिन राम रहीम को सजा सुनाई गई उस दिन किसी से बात नहीं की और उसके जेल जाने के बाद मानसिक रूप से तनाव में रहने लगे। सारी जमीन-जायदाद तो पहले ही डेरे पर लूटा चुके थे लेकिन जब आस्था को ठेस पहुंची तो इसकी चोट अंतरात्मा पर जाकर लगी। वे न ही परिजनों से नजर मिलाने के लायक रहे और न ही समाज से। बस इसी शर्मिंदगी में उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। राम रहीम ने उसके पिता को समाज की नजरों से ही नहीं खुद की भी नजरों से गिरा दिया। ऐसा जिसके साथ हो जाए वो जीवित रह ही नहीं सकता।
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उधर, जिला प्रशासन भी सोमबीर के आत्महत्या करने के बाद उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो गया है। जिला पुलिस ने सोमबीर के परिवार की सुरक्षा में दो गनमैन तैनात कर दिए हैं। ये चौबीसों घंटे सिविल वर्दी में उनकी सुुरक्षा में तैनात रहेंगे। डेरे की प्रताड़ना का यह मामला सामने आने के बाद जिले में ऐसे और भी मामले होने का अनुमान है। जिला प्रशासन ने इस तरह की प्रताड़ना से पीड़ित अनुयायियों से अपील कि है कि अगर ऐसा और किसी के साथ हुआ है तो बेहिचक पुलिस को अपनी शिकायत दे सकता है। ऐसे अनुयायियों को प्रशासन से डरने की जरूरत नहीं है। वहीं, सोमबीर का शनिवार शाम शव गांव में पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। सोमबीर द्वारा उठाए कदम से ग्रामीण भी अचरज में हैं। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के अंधविश्वास की चक्की में पीसने से दुखी हर कोई सहानुभूति दे रहा है। चौपाल पर बैठे सूबे सिंह ने बताया कि डेरा प्रमुख तो पाखंडी था। उसने हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। ग्रामीण संदीप का कहना है कि अंधविश्वास का पर्दा कुछ देर के लिए तो डाला जा सकता है लेकिन ताउम्र उसका सहारा नहीं लिया जा सकता।

बेटे ने खाईं ठोकरें, रक्षाबंधन पर जबरन करवाया 13 लाख का परमार्थ
सोमबीर के बेटे प्रदीप ने बताया कि करीब दो-तीन साल पहले उसके पिता ने डेरे को जमीन दान देने की बात उसके सामने की थी। उसने ऐसा करने से मना कर दिया। इससे उसके पिता और उसमें झगड़ा भी हुआ। आखिरकार उसके पिता ने उसे घर से जाने के लिए बोल दिया। प्रदीप ने बताया कि करीब एक साल वह घर से दूर रहा और अपनी रिश्तेदारों की भी उसे मदद लेनी पड़ी। प्रदीप ने बताया कि उसके पिता को रक्षाबंधन पर्व पर भी परमार्थ करने के लिए बाध्य किया गया। प्रदीप ने बताया कि डेरा प्रमुख ने उसके पिता को मजबूर कर आठ लाख रुपये की गाड़ी और पांच लाख रुपये नकद का परमार्थ भी करवाया। इस बात का उन्हें कुछ समय पहले ही बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला।

सबूत के तौर पर संभाली हैं डेरे की वस्तुएं, कोर्ट का लेंगे सहारा
प्रदीप ने बताया कि डेरा कमेटी उन्हें सामान्य सी वस्तुएं लाखों रुपये में जबरन देती रही। डेरे के पूर्व प्रमुख शाह सतनाम की गुफा तोड़कर निकाली गई सभी ईंटें एक से सवा लाख रुपये में अनुयायियों को जबरन बेची गई। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जबरन परमार्थ करवाकर उसके पिता को डेरे ने करीब 10-12 वस्तुएं दीं जिनमें से कुछ को तो वो नष्ट कर चुके हैं जबकि कुछ को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने के लिए रखा है।

दो अनुयायियों के साथ और ठगी का मामला आया सामने
गांव बलकरा निवासी दो और अनुयायियों के साथ ठगी का मामला होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। चौपाल में बैठे बुजुर्गों की मानें तो डेरा पर अंधविश्वास करने वाले अनुयायियों की संख्या गांव में काफी है। करीब 100 से अधिक घर डेरे से जुड़े थे। इन बुजुर्गों ने बताया कि वहां से सामान्य सी चीजें हजारों रुपये में ये खरीदकर लाते थे। अनुयायियों के नाम न छापने की शर्त पर बुजुर्गों ने बताया कि एक तो डेरे से 51 हजार में आलू और एक 51 हजार में शिमला मिर्च खरीदकर लाया है। उन्होंने बताया कि एक अनुयायी 11 हजार में हरी मिर्च लाया था।

भाई कै बतावां, सोमबीर तो धन त्य भी गया हर जाण त्य भी

सोमबीर का परिवार पिछले कई सालों से डेरे से जुड़ा है। सोमबीर के मन में डेरा प्रमुख राम रीम के प्रति अटूट श्रद्धा थी। जब वह डेरा नहीं पहुंचता था तो डेरा प्रमुख के करीबी गांव पहुंच जाते थे। एक ढोंगी ने हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। - सूबे सिंह, ग्रामीण
सोमबीर ने सिरसा डेरे ही हर तरह से सेवा की। जमीन बेचकर उसने डेरे की रुपयों संबंधी डिमांड पूरी की तो वहीं डेरे के लिए परिजनों तक से झगड़ा किया। राम रहीम को बलात्कार मामले में सजा मिलने के बाद सोमबीर अंदर से टूट गया था। - संदीप, ग्रामीण
अनुयायियों के अंधविश्वास का फायदा उठाकर डेरा प्रमुख ने उन्हें जमकर लूटा। हमारे गांव में भी बहुत से अनुयायी ऐसे हैं जो श्रद्धा की आड़ में दस से 20 रुपये की वस्तुएं हजारों या लाखों में लाए हैं। अब अंधविश्वास की चादर हटने लगी है। - सतीश, ग्रामीण
डेरे से जुड़ने से पहले सोमबीर का परिवार आर्थिक रूप से साधन संपन्न था। डेरे ने उस पर दबाव बनाकर उसकी संपत्ति हड़प ली। सोमबीर के परिवार को धन हानि के साथ-साथ जन हानि भी हुई। राम रहीम ने एक सकुशल परिवार को उजाड़ दिया। - महेश, ग्रामीण
आस्था की आड़ में डेरा प्रमुख ने अपने अनुयायियों की भावना से खिलवाड़ किया है। हमारे सामने तो एक ही मामला आया है न जाने प्रदेश और देश में सोमबीर जैसे कितने अनुयायी होंगे, जिन्हें डेरे ने तबाह कर दिया। राम रहीम संत नहीं ढोंगी है। - होशियार सिंह, वृद्ध ग्रामीण
करीब 50 एकड़ जमीन सोमबीर के परिवार के पास थी लेकिन अब आठ-दस एकड़ जमीन ही बची है। जनता का ऐसे लोगों पर अंध विश्वास ही इनके हौसले बढ़ाता है। सोमबीर और परिवार के साथ गलत हुआ। जिला प्रशासन को इन्हें न्याय दिलाना चाहिए। - रणबीर सिंह, ग्रामीण
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वर्जन::
हमने एहतियात के तौर पर मृतक के परिवार की सुरक्षा में पुलिस कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। मामले की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों ने जो बयान हमें दिए थे उन तथ्यों की सत्यता की जांच पुलिस कर रही है। जांच में जो भी सामने आएगा उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - सुनील दलाल, एसपी
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