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50 साल का होने के बावजूद असुरक्षित है एटीएम

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
बैंक में जमा नकदी हासिल करने का सबसे सरल माध्यम बनी ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) आज 27 जून को 50 बरस की हो गई है। लेकिन आज तक यह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही। इसके असुरक्षित होने के कारण बैंक और उपभोक्ता दोनों को नुकसान हो रहा है। अकेले बहादुरगढ़ में पिछले तीन महीने में आठ उपभोक्ताओं को करीब साढ़े पांच लाख की चपत लग चुकी है।
बहादुरगढ़ में 2005 में लगा पहला एटीएम
आज के दिन ही वर्ष 1967 में पहली एटीएम शुरू हुई थी। भारत में पहला एटीएम सितंबर 1987 को लगा। सिटी बैंक और एचएसबीसी बैंक ने मुंबई में अपनी ब्रांच के पास एटीएम लगाए थे। वर्ष 1999 तक भारत में 800 एटीएम बूथ थे। जोकि अब दो लाख से अधिक हो चुके हैं। आरबीआई के अप्रैल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में फिलहाल 2,07,813 एटीएम हैं। बहादुरगढ़ इलाके में 62 बूथ हैं।
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रिटायर्ड बैंक अधिकारी भुवनेश सिंगल ने बताया कि बहादुरगढ़ शहर में वर्ष 2005 में पहली एटीएम मशीन लगी थी। यह पीएनबी की दिल्ली रोड ब्रांच के निकट है। उसके बाद से बहादुरगढ़ में उपभोक्ताओं को तमाम बैंकों से ये सुविधा मिल रही है। फिलहाल शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या 62 से अधिक हो चुकी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और तमाम मुख्य मार्गों पर बैंकों के एटीएम लगे हैं।
...तो यूं हुई शुरुआत
एटीएम का आविष्कारक जान शेफर्ड बैरन को माना जाता है। उनका जन्म भारत के मेघालय राज्य की राजधानी शिलांग में हुआ था। 23 जून, 1925 को जन्मे बैरन ब्रिटेन में पले-बढ़े। शेफर्ड एक दिन चेक डिपाजिट करने के लिए बैंक गए, लेकिन तब तक बैंक बंद हो चुका था। तभी उन्हें याद आया कि क्यों न ऐसी कैश मशीन बनाई जाए जो चॉकलेट मशीन के जैसे काम करे। तब उन्होंने इसका आविष्कार किया। इसके निर्माण में इंजीनियर डे ला रुई का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। एटीएम की सबसे पहली पीढ़ी का प्रयोग 27 जून, 1967 में लंदन के बार्कले बैंक ने किया था। उस समय आज के एटीएम कार्ड के बजाय क्रेडिट कार्ड के जरिए इसकी सेवाओं का उपयोग किया जाता था। इसके पहले ग्राहक कामेडी एक्टर रेग वरने बने थे। वर्तमान एटीएम मशीनें इंटरबैंक नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं। ये नेटवर्क पीयूएलएसई, पीएलयूएस आदि नामों से जाने जाते हैं।
तीन महीने में आठ लोगों से धोखाधड़ी
रुपये निकालने की सुविधा के बढ़ने के साथ ही खतरे भी बढ़ गए हैं। लोगों में जागरूकता की कमी कहें या बैंकों की लापरवाही, एटीएम बूथों में शातिरों द्वारा आए दिन लोगों का पैसा उड़ाया जा रहा है। इस साल में दर्जनभर वारदातें हो चुकी हैं। पिछले तीन महीनों में तो कुल आठ वारदातें हुई हैं। आठों वारदातों में तमाम निर्धन लोग शिकार हुए हैं। इनकी कुल पांच लाख 51 हजार 500 रुपये की जमा राशि उड़ाई है। बड़ी बात ये है कि पुलिस केवल केस दर्ज करने तक सीमित रह गई है। इनमें से कोई भी वारदात सुलझ नहीं पाई है।

- 7 अप्रैल को टीकरी कलां निवासी जहीरुद्दीन के खाते से निकाले एक लाख पांच हजार
- 9 अप्रैल को टीकरी बार्डर निवासी राम बहादुर के खाते से निकाले 50 हजार
- 25 अप्रैल को माडल टाउन निवासी कृष्ण लाल के खाते से उड़ाए 1.50 लाख
- 26 अप्रैल को अग्रवाल कालोनी निवासी मुकेश के खाते से निकाले 24 हजार
- 8 जून को टीकरी कलां निवासी टिंकू के खाते से निकाले 30 हजार
- 10 जून को सांखोल निवासी रानी के खाते से निकाले 60 हजार
- 17 जून को एमआईई निवासी अजित के खाते से निकाले 58,500 हजार
- 25 जून को दिल्ली निवासी चंद्रशेखर के खाते से निकाले 83 हजार

नहीं मिलते सिक्योरिटी गार्ड
हालांकि एटीएम कक्ष में एक बार में एक ही व्यक्ति के प्रवेश करने का प्रावधान है। लेकिन उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी और बैंकों की अनदेखी के कारण यह व्यवस्था हमेशा बिगड़ी रहती है। अधिकांश एटीएम बूथों में सुरक्षाकर्मी देखने को भी नहीं मिलता। जहां है तो बाहर कुर्सी पर बैठा होता है या इधर-उधर निकल जाता है। यही कारण है कि एटीएम बूथों में घुसकर शातिर लोग सरलता से लोगों को ठग लेते हैं। सोमवार की शाम भी कई एटीएम बूथों पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं थे।
नहीं होता नियमों का पालन
एक एटीएम लगाने में बैंक को दो करोड़ रुपये तक लगाने पड़ते हैं। एक एटीएम के रखरखाव पर हर महीने करीब 50 हजार का खर्च आता हैं। मेंटीनेंस के नाम पर नकदी भरना, दिन में दो बार एटीएम परिसर की सफाई, एसी, एटीएम मशीन का जीरो डाउन होना, सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे, हर लेनदेन की पर्ची, दरवाजे का बंद रहना। ताकि एक समय में एक ग्राहक एटीएम में रहे। रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था, सुरक्षा के लिए गार्ड आदि इनके वार्षिक मेंटेनेंस के कुछ प्रमुख हिस्से हैं। लेकिन इन नियमों का पालन बेहद कम होता है।
जागरूक रहें और धोखाधड़ी से बचें
यदि बैंक उपभोक्ता एटीएम सुविधा चाहता है, तो सही इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। उपभोक्ता अपना पिन किसी से शेयर न करें। हां, कई बार एटीएम मशीनों में कैश फंस जाता हैं और अकाउंट से रुपये कट जाते हैं। इससे घबराएं नहीं। बैंक को लिखित में शिकायत दें। 10-15 दिन में रुपये वापस आ जाते हैं। लोग जागरूक रहें और धोखाधड़ी की वारदातों से बचें।
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- राजकुमार, मैनेजर, विजया बैंक बहादुरगढ़।

ये बरतें सावधानी
- एटीएम बूथ में तभी प्रवेश करें जब कोई अंदर न हो।
- यदि आसपास कोई हो तो अपने दूसरे हाथ से कीपैड को ढकें, ताकि कोई आपका कोड न देख पाए।
- यदि रात को पैसा निकालने जाएं तो कम से कम एक साथी जरूर आपके साथ हो।
- एटीएम कार्ड को पहले से बाहर निकाल कर रखें। मशीन के पास पहुंचने पर अपने पर्स आदि से कार्ड निकालने में समय न लगाएं।
- कैश निकालने के दौरान किसी अनजान शख्स से बातचीत न करें। किसी बाहरी से मदद न लें।

क्या कहती है पुलिस
एटीएम बूथों में नासमझ ग्राहकों को झांसा देकर उनके पैसे ठगने के कई मामले पुुलिस सुलझा चुकी है। बाकी भी सुलझाए जाएंगे। ग्राहकों के साथ धोखा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कार्ड धारकों को भी सतर्क रहना चाहिए। बैंकों को चाहिए कि एक बार में बूथ में सिर्फ एक ही ग्राहक को प्रवेश करने दें। इसके लिए प्रशिक्षित गार्ड हर वक्त रहना चाहिए।
- भगतराम, डीएसपी बहादुरगढ़

- सुरक्षा के अभाव में उपभोक्ता और बैंक दोनों का हो रहा नुकसान
- 27 जून 1967 को सामने आई थी ऑटोमेटेड टेलर मशीन
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