अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
नेशनल हाईवे -152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन की मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसानों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम और एनएचआई अधिकारियों से 48 घंटे में दूसरी बार वार्ता के लिए बुलाया। एक घंटे बंद कमरे चली वार्ता विफल रही। बैठक कक्ष से बाहर आकर किसान बोले कि प्रशासन केवल उनका समय बर्बाद कर रहा है, समाधान के नाम पर मजाक हो रहा है। इसके बाद धरनास्थल पर पहुंचकर किसान नेताओं ने मंथन कर जल्द बड़ा कदम उठाने की बात कही। कदम क्या होगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
गत बुधवार को भी धरनास्थल पर पहुंचे नायक तहसीलदार ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को वीरवार को डीसी के साथ बैठक का निमंत्रण दिया था। वीरवार सुबह 11 बजे किसानों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लघु सचिवालय पहुंचा था। वहां उनकी एसडीएम सतबीर कुंडू और एनएचआई अधिकारियों से बैठक हुई। करीब एक बजे तक बैठक चली, लेकिन बाहर आकर किसानों ने जिला प्रशासन पर ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। शनिवार को एसडीएम ने पुन: वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल को बुलाया। सुबह करीब साढ़े 11 बजे किसानों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल अनुप फौगाट, विनोदी मौड़ी, रामनगर सरपंच राजीव यादव, राजकुमार मकड़ाना व बिजेंद्र टिकाण कलां तहसील कार्यालय पहुंचे। वहां उनकी एक घंटे तक एसडीएम और एनएचआई अधिकारियों से बातचीत हुई। बाहर आकर किसानों ने बातचीत का पूरा ब्योरा तो नहीं बताया लेकिन इतना कहा कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। उनके साथ वार्ता के नाम पर मजाक किया जा रहा है।
धरने पर संबोधित करते हुए समाजसेवी मनीषा सांगवान ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के नाम पर सरकार और प्रशासन ने मिलकर किसानों के साथ अन्याय किया है। किसानों की लड़ाई में उनका संगठन समर्थन करेगा। किसानों ने कहा कि नए अधिनियम में उपजाऊ भूमि का किसानों को प्रति एकड़ चार करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए जबकि सरकार पुराने एक्ट को आगे रख महज 22 लाख रुपये प्रति एकड़ ही मुआवजा दे रही है। उधर, गुप्तचर विभाग भी सभी गतिविधियों पर नजर रखे है।
ग्यारह मार्च को सांसद धर्मबीर किसानों के प्रतिनिधिमंडल को एनएचआई के पदाधिकारियों से मिलवाकर समस्या का समाधान कराएंगे।
सतबीर कुंडू, एसडीएम